मुख्यपृष्ठसमाचारमहाराष्ट्र घोड़ाबाजार! उनके पास वॉशिंग मशीन, पार्टी बदलते ही अपराध मुक्त!!

महाराष्ट्र घोड़ाबाजार! उनके पास वॉशिंग मशीन, पार्टी बदलते ही अपराध मुक्त!!

-‘भाजपा मुर्दाबाद’ और ‘अमित शाह मुर्दाबाद’ के नारे लगानेवालों को तड़ीपार नहीं किया जा सकता

-हाई कोर्ट ने पुलिस के ऐंठे कान, मुस्लिम आंदोलनकर्ताओं का तड़ीपारी आदेश रद्द

-न्यायालय ने यह सवाल भी उठाया कि जब पेपर लीक जैसी घटनाएं हो रही हैं तो क्या उन मामलों में विरोध प्रदर्शन करनेवालों के आंदोलनों को भी दबाया जाएगा? कोर्ट ने कहा कि आंदोलन से समाज को खतरा नहीं हो सकता है। लोगों को अभिव्यक्ति का अधिकार है।

सामना संवाददाता / मुंबई

‘भाजपा मुर्दाबाद, अमित शाह मुर्दाबाद जैसे नारे लोग क्यों नहीं लगा सकते? आपने लोगों को सरकार का गुलाम बना दिया है। केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध करनेवालों को केवल नारे लगाने के कारण तड़ीपार नहीं किया जा सकता। आप प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नौकर नहीं, बल्कि जनता के सेवक हैं, यह मत भूलिए। धरना-प्रदर्शन और आंदोलनों को दबाया नहीं जा सकता। इन शब्दों में उच्च न्यायालय ने गुरुवार को पुलिस को कड़ी फटकार लगाई।
सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के सचिव सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी के खिलाफ पुलिस ने तड़ीपार का आदेश जारी किया था। इसके खिलाफ उन्होंने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। इस याचिका पर न्यायमूर्ति माधव जामदार की एकल पीठ ने सुनवाई की।
पुलिस का कहना था कि चौधरी केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में प्रदर्शन करते थे और ‘भाजपा मुर्दाबाद’ तथा ‘अमित शाह मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाते थे। इसी आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। पुलिस ने दावा किया कि उनके खिलाफ ऐसे पांच मामले दर्ज हैं।
इस पर न्यायालय ने कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि क्या लोगों को आंदोलन करने का भी अधिकार नहीं है? आंदोलनों को दबाना उचित नहीं है। इसके बाद न्यायालय ने चौधरी के खिलाफ जारी तड़ीपार का आदेश रद्द कर दिया।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि एक काम कीजिए, अभी महाराष्ट्र में अच्छी-खासी खरीद फरोख्त चल रही है। आप अपना दल बदल लीजिए, आपके सारे मामले तुरंत खत्म हो जाएंगे। उनके पास वॉशिंग मशीन है। यह टिप्पणी करते हुए न्यायालय ने चौधरी की तड़ीपारी रद्द कर दी।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह भी कहा कि चेंबूर में पेड़ गिरने से १० वर्षीय बच्चे की मौत हो गई, लेकिन सदन में उस पर चर्चा करने के बजाय दल-बदल और उपसभापति के चुनाव पर चर्चा हो रही थी, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।

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