कविता श्रीवास्तव
जरा सोचिए… अगर कोई आपसे पूछे कि ऐसी कौन-सी डिश है, जिसे देखकर डाइट पर चल रहा इंसान भी कह दे—‘चलो, आज चीट डे ही सही… खा ही लेते हैं!’ मन को ललचाने वाला यह व्यंजन है बिरयानी! इसके हर दाने में स्वाद, हर परत में खुशबू और हर कौर में शाही एहसास! जी हां, यही है बिरयानी, जिसके दीवाने सिर्फ भारत में नहीं, पूरी दुनिया में हैं। इसीलिए अब हर साल जुलाई के पहले रविवार को विश्व बिरयानी दिवस भी मनाया जाने लगा है। आज वही दिन है।
बिरयानी का नाम सुनते ही लंबे-लंबे बासमती चावल, केसर की भीनी-भीनी खुशबू, मसालों की महक और दम में पकी लाजवाब परतें आंखों के सामने उभरने लगती हैं। फिर चाहे चिकन बिरयानी हो, मटन बिरयानी या मछली बिरयानी या फिर वेज बिरयानी या पनीर बिरयानी, हर प्लेट का अपना दीवानापन है। बताते हैं कि ‘बिरयानी’ फारसी शब्द है। ‘बिरियान’ यानी भूनना और ‘बििंरज’ यानी चावल। मुगल काल में यह शाही रसोई की शान बनी और फिर भारतीय मसालों के साथ ऐसी घुली-मिली कि आज पूरी दुनिया इसकी दीवानी है। भारत में बिरयानी की ‘स्टार’ वैरायटीज हैं। हैदराबादी बिरयानी अपने दमदार मसालों और दम कुकिंग के लिए मशहूर है, तो लखनऊ की अवधी बिरयानी अपनी नफासत और हल्के शाही स्वाद के लिए पहचानी जाती है। इसके अलावा कोलकाता, मालाबार, मुंबई, सिंधी और कश्मीरी बिरयानी भी अपने अनोखे स्वाद के कारण लोगों की पसंद हैं। दरअसल, पकाने का जादू ही बिरयानी को खास बनाता है। चावल, मसाले और सब्जियां या मांस को परत-दर-परत सजाकर धीमी आंच में दम पर पकाने से हर दाना अपने भीतर खुशबू और स्वाद समेट लेता है। एक मार्च २००८ को दिल्ली में रिकॉर्ड बिरयानी बनी थी। ६० रसोइयों ने १६ फुट गहरी विशाल हांडी में १४,०६० किलोग्राम, यानी १४ टन बिरयानी बनाई थी। यह उपलब्धि गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में है और भारतीय पाक-कला का शानदार उदाहरण है। आज बिरयानी भारत की सीमाओं से बहुत आगे निकलकर मध्य-पूर्व से लेकर यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया तक लोगों की पहली पसंद है। ऑनलाइन फूड डिलिवरी ऐप्स पर भी यह सबसे ज्यादा ऑर्डर की जाने वाली डिशों में शामिल है। असल में बिरयानी सिर्फ खाना नहीं, एक एहसास है। दोस्तों की पार्टी हो, परिवार का मिलन, शादी-ब्याह का जश्न या फिर छुट्टी का दिन; एक बड़ी-सी बिरयानी की डेग पूरे माहौल को खुशियों से भर देती है।
