राजेश सरकार / प्रयागराज
जिले में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। औद्योगिक क्षेत्र थाना में गर्भस्थ शिशु की मौत और प्रसूता की जान खतरे में डालने के आरोप में एक महिला चिकित्सक के खिलाफ डीएम के आदेश पर एफआईआर दर्ज होने के बाद अब नैनी के एक निजी चिल्ड्रेन अस्पताल के संचालक चिकित्सक के खिलाफ भी मरीज की मौत के मामले की जांच शुरू किया जाना तय माना जा रहा है। डीएम ने सीएमओ को जांच सौंपी है। जांच चल भी रही है। दोनों मामलों ने निजी चिकित्सा संस्थानों में इलाज की गुणवत्ता और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
छह माह पहले मामले में औद्योगिक क्षेत्र थाना पुलिस ने बुधवार देर रात डीएम के निर्देश पर एक महिला चिकित्सक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। शिकायतकर्ता गणेश शंकर शुक्ल के अनुसार, उनकी गर्भवती पत्नी वशिता का इलाज एक निजी अस्पताल में चल रहा था। 28 अक्तूबर 2025 को प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर ने डिलीवरी में करीब 20 दिन का समय बताते हुए इंजेक्शन और दवाएं देकर घर भेज दिया। आरोप है कि बाद में भी फोन पर गर्भस्थ शिशु की स्थिति सामान्य बताई जाती रही।
शिकायत के अनुसार, पांच नवंबर को गर्भवती की तबीयत बिगड़ने पर दोबारा अस्पताल पहुंचने पर बताया गया कि बच्चे की मूवमेंट बंद हो चुकी है और गर्भ में ही उसकी मौत हो गई है। परिजनों का आरोप है कि विरोध करने पर चिकित्सक ने अभद्र व्यवहार किया और धमकी भी दी। इसके बाद करछना के एक अन्य अस्पताल में जांच के दौरान गर्भस्थ शिशु के शरीर में सड़न फैलने की जानकारी दी गई। सात नवंबर को मृत शिशु को बाहर निकाला गया। पीड़ित परिवार ने मामले की शिकायत जिलाधिकारी से की थी। डीएम के निर्देश पर सीएमओ ने विशेषज्ञों की मेडिकल टीम गठित कर जांच कराई। करीब छह माह बाद आई जांच रिपोर्ट में लापरवाही के बिंदु सामने आने पर कार्रवाई की संस्तुति की गई। इसी रिपोर्ट के आधार पर औद्योगिक क्षेत्र थाना पुलिस ने महिला चिकित्सक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। थाना प्रभारी कमलेश पटेल ने मुकदमा दर्ज होने की पुष्टि की है। इसी तरह का एक मामला कुछ दिन पहले भी सामने आया था, जिससे नैनी स्थित एक निजी चिल्ड्रेन अस्पताल भी विवादों में आ गया है। मृतक के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल के संचालक चिकित्सक ने एक व्यक्ति को टीबी बताकर उसका उपचार किया, जबकि बाद में उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई। परिजनों का कहना है कि इलाज पर लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद मरीज की जान नहीं बच सकी। बाद में उसे लखनऊ के मेदांता अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
मृतक की पत्नी ने इस मामले में जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्साधिकारी से शिकायत कर चिकित्सक पर गलत इलाज और लापरवाही का आरोप लगाया है। शिकायत के बाद डीएम ने सीएमओ को जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। मामला सामने आने और विभिन्न समाचार पत्रों में खबरें प्रकाशित होने के बाद संबंधित चिकित्सक ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपने ऊपर लगे आरोपों का खंडन किया। उन्होंने दावा किया कि मरीज की जांच के बाद उपलब्ध लक्षणों के आधार पर दवा दी गई थी और उपचार चिकित्सकीय प्रक्रिया के अनुरूप किया गया था। फिलहाल दूसरे मामले में जांच जारी है और प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
