अरुण कुमार गुप्ता
यूएई की एक हेल्थ कंपनी थी, जिसका मालिक एक एनआरआई बीआर शेट्टी था। जब भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूएई जाते थे तो शेट्टी मोदी का स्वागत करने वालों में सबसे आगे रहता था। जब २०१९ में यूएई में बीएपीएस यानी बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामी नारायण संस्था द्वारा हिंदू मंदिर की नींव रखी जा रही थी तो मंदिर की देख-रेख करने वाली कमेटी का शेट्टी को अध्यक्ष तक बना दिया गया। जैसे अयोध्या के श्रीराम मंदिर का चंपत राय को सर्वेसर्वा बनाया गया था। याद रहे कि मंदिर का उद्घाटन १४ फरवरी २०२४ को नरेंद्र मोदी ने किया था। २०२० में एनएमसी हेल्थ का ४५ हजार करोड़ का घोटाला पकड़ा गया। एक फॉरेंसिक ऑडिट में पता चला कि इस कंपनी ने हजारों करोड़ का कर्ज़ दुनिया से छुपा रखा था। जबकि कंपनी घाटे में चल रही थी। इसके खर्च का बड़ा हिस्सा भारत का सरकारी बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा में भी दे रखा था। जैसे ही २०२० में इस कंपनी का घोटाला पकड़ा गया आबू धाबी की कोर्ट ने इस कंपनी का सारा मैनेजमेंट छीन लिया और अपने लोगों के हाथ में दे दिया। जिसे एडमिनिस्ट्रेटस कहते हैं। जब एडमिनिस्ट्रेटस ने जांच की तो पता चला कि बैंक ऑफ बड़ौदा ने ‘नो योर कस्टमर’ और ‘एंटी मनी लॉन्ड्रिंग’ नियमों का पालन ही नहीं किया है। बैंक ने जानबूझकर कंपनी के फेक, फर्जी, इनवॉइस और ट्रांजैक्शन को प्रोसेस किया। जिससे कंपनी अपना कर्ज छुपाने में कामयाब रही और लोगों को दिखाती रही कि कंपनी बहुत प्रॉफिट में है। जिन लोगों ने कंपनी में पैसा लगा रखा था उनका पैसा डूब गया। यह पता चलने के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा के खिलाफ एक केस अबू धाबी में और दूसरा का केस लंदन में दर्ज कर लिया गया। अब खबर आ रही है कि इसी महीने यानी जुलाई में बैंक ऑफ बड़ौदा ने ५,७०० करोड रुपए में कोर्ट के बाहर एडमिनिस्ट्रेटस से समझौता कर लिया है। क्योंकि बैंक ऑफ बड़ोदा सरकारी बैंक है इसलिए वह ५,७०० करोड़ रुपए जनता के पैसे थे। अब बैंक की बेशर्मी देखिये। बैंक का कहना है कि अबू धाबी और लंदन में केस लड़ने पर बहुत खर्चा हो रहा था। इसलिए हमने समझौता कर लिया। अब समझौता क्यों, किसके कहने पर और किसकी छत्रछाया में किया गया, यह आप भली-भांति समझ सकते हैं।
‘महामानव’ की विदेश यात्रा!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेश यात्राओं का रिकॉर्ड बनाया है। अब तक इस देश में इतनी विदेश यात्रा का रिकॉर्ड किसी भी प्रधानमंत्री के पास नहीं है। नरेंद्र मोदी ने अपने १२ साल के कार्यकाल में करीब १०० विदेश यात्राएं पूरी कर ली हैं। इस दौरान करीब ८० देशों की सैर हमारे महामानव कर चुके हैं। अब तक मोदी जी के विदेश दौरों पर ८०० करोड़ से ज्यादा रुपए खर्च हो चुके हैं, लेकिन बदले में देश को क्या मिला है। कुछ नहीं, लेकिन मोदी जी को अवॉर्ड खूब मिले हैं। हां! उद्योगपति गौतम अडानी को बिजनेस जरूर मिला है। जहां भी मोदी जी गए हैं वहां अडानी के लिए कुछ ना कुछ जरूर मिला है। इस समय मोदी जी फिर विदेश दौरे पर निकले हैं। इंडोनेशिया में उन्हें इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान मिला, इंडोनेशिया की शहर के बाद मोदी जी ऑस्ट्रेलिया निकाल दिए, लेकिन सवाल वही है कि इंडोनेशिया से भारत को क्या मिला। मोदी जी के दौरों से यही साबित हो रहा है कि वह अवॉर्ड के भूखे हैं। अवॉर्ड के लिए विदेश का दौरा करते हैं, लेकिन पैसा तो देश के टैक्स पेयर का बर्बाद होता है। इसका जवाब कौन देगा। मोदी जी के इन विदेशी दौरों की कीमत देश ने चुकाई है। यह सभी लोगों ने देख लिया है। ईरान, अमेरिका- इजरायल युद्ध से सिर्फ दो दिन पहले मोदी जी ने इजरायल का दौरा किया और दो दिन बाद युद्ध शुरू हो गया। इसके बाद पूरे देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की किल्लत शुरू हो गई। नोटबंदी की तरह लोग रात-रातभर रसोई गैस सिलेंडर के लिए लाइन में लगे रहे। भारत का विश्वसनीय मित्र ईरान से पेट्रोलियम पदार्थ आना बंद हो गया। नतीजे में पूरा देश पेट्रोल, डीजल और गैस रसोई गैस की लाइन में लग गया। जय हो मोदी सरकार की। जय हो महामानव की।
