मुख्यपृष्ठस्तंभरुख-ए-सियासत : युद्ध की भाषा और बाजार की बेचैनी

रुख-ए-सियासत : युद्ध की भाषा और बाजार की बेचैनी

तौसीफ कुरैशी

युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता। उसकी गूंज संसदों में भी सुनाई देती है, बाजारों में भी और आम आदमी की जेब में भी। जब कोई दुनिया का सबसे ताकतवर देश मानने वाला और पश्चिम एशिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति फिर आमने-सामने खड़े दिखें, तो सिर्फ मिसाइलें नहीं, शेयर बाजार भी कांप उठते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एलान कर दिया कि ईरान के साथ युद्धविराम अब उनके लिए समाप्त हो चुका है। इतना ही नहीं, उन्होंने ईरान के नेतृत्व को `घटिया’, `झूठा’ और `मानसिक रूप से बीमार’ तक कह डाला। दूसरी ओर ईरान के विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने उसके दक्षिणी तट के पास मौजूद निगरानी और सर्विलांस केंद्रों पर हमला करके युद्ध समाप्ति से जुड़े समझौते का उल्लंघन किया है। तेहरान ने साफ चेतावनी दी कि जिन ठिकानों से उस पर हमले हुए हैं या जिनसे भविष्य में हमले की योजना बनेगी, वे ईरानी सशस्त्र बलों के निशाने पर होंगे। यानी युद्धविराम की स्याही सूखी भी नहीं थी कि बारूद की गंध फिर हवा में घुलने लगी। दुनिया एक बार फिर अस्थिरता के मुहाने पर खड़ी दिखाई दे रही है। इस तनाव का पहला असर रणभूमि से पहले बाजार पर दिखाई दिया।
भारत के शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज हुई। सेंसेक्स करीब १,६५० अंक लुढ़क गया। यह केवल निवेशकों का घाटा नहीं, बल्कि उस वैश्विक चिंता का संकेत है जो हर युद्ध की आशंका के साथ जन्म लेती है। निवेशक सबसे पहले जोखिम से भागते हैं, क्योंकि युद्ध में सबसे पहले भरोसा मरता है। राजनीति का असली धर्म संवाद है। जहां संवाद की जगह अपमान ले लेता है, वहां शांति की संभावना सिकुड़ने लगती है। महाशक्तियों के नेताओं के शब्द केवल बयान नहीं होते, वे पूरी दुनिया की दिशा तय करते हैं। जब शब्द तलवार बन जाएं, तो बाजार भी कांपते हैं और कूटनीति भी।
सीमा पर जंग, असर हर रसोई तक
पश्चिम एशिया पहले से ही कई संघर्षों की आग में झुलस रहा है। ऐसे समय अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तल्खी तेल की कीमतों, वैश्विक व्यापार, समुद्री सुरक्षा और विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर गहरा असर डाल सकती है। भारत जैसा बड़ा आयातक देश भी इससे अछूता नहीं रह सकता। महंगा तेल, बढ़ती महंगाई और डगमगाते बाजार अंतत: आम नागरिक की थाली तक पहुंचते हैं। इतिहास बताता है कि हर युद्ध का अंत बातचीत से ही हुआ है। इसलिए दुनिया को आज मिसाइलों से अधिक संवाद की जरूरत है।
दान केवल पैसा नहीं होता, वह विश्वास का दूसरा नाम है। जब कोई व्यक्ति भगवान के चरणों में अपनी कमाई का एक हिस्सा रखता है, तो वह किसी संस्था पर नहीं, अपनी आस्था पर भरोसा करता है। इसलिए मंदिरों, ट्रस्टों और धार्मिक संस्थाओं से जुड़ा हर प्रश्न केवल लेखा-जोखा का प्रश्न नहीं होता, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास का प्रश्न होता है।
हाल के दिनों में श्रीराम मंदिर के लिए एकत्रित दान और उससे जुड़े कुछ व्यक्तियों के संबंध में विभिन्न आरोप और शिकायतें सार्वजनिक चर्चा का विषय बनी हैं, ऐसी ही एक शिकायत कर्नाटक निवासी दीपक पुत्र दिगंबर राव पाटील सामाजिक कार्यकर्ता सूचना का अधिकार कानून आरटीआई कार्यकर्त्ता ने कर्नाटक के भाजपा विधायक प्रभु चव्हाण व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख पदाधिकारी गोपाल जी के साथ मिलकर चंदा चढ़ावा चोरी में गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं `लूट ली गई अयोध्या, हर स्तर पर लूट हुई।’
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे और दान राशि में गबन के आरोपों की जांच कर रही एसआईटी को कर्नाटक के एक आरटीआई कार्यकर्ता ने नई शिकायत भेजी है। शिकायतकर्ता दीपक पुत्र दिगंबर राव पाटील ने यह पत्र मंडलायुक्त लखनऊ विजय विश्वास पंत जो एसआईटी के अध्यक्ष भी हैं, आईजी एस. किरण और विशेष सचिव वित्त नील रतन को भेजा हैं। शिकायत में लगाए गए मुख्य आरोप गोपालजी आरएसएस के प्रमुख पदाधिकारी, प्रभु चव्हाण कर्नाटक के बीदर जिले, औराद विधानसभा के वर्तमान भाजपा विधायक सतीश नवबाडे गोपालजी के निकट सहयोगी, `आदित्य डेवलपर्स’ से जुड़े है। दीपक पाटील का आरोप है कि इन लोगों ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण हेतु औराद तालुका के ठेकेदारों से बड़ी मात्रा में अविवरणित दान राशि एकत्र की। दावे के अनुसार, प्रत्येक ठेकेदार से न्यूनतम ५ लाख रुपए या उससे अधिक दान लिया गया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि दान संग्रह और मंदिर उद्घाटन के बाद से इन लोगों की संपत्ति में `अत्यधिक और निरंतर वृद्धि’ हुई। आरोप १०० एकड़ से अधिक कृषि भूमि रिश्तेदारों के नाम बेनामी खरीदी गई महाराष्ट्र और कर्नाटक के विभिन्न जिलों में बाजार मूल्य से अधिक देकर जमीन खरीदी गई। सतीश नवबाडे `आदित्य डेवलपर्स’ के माध्यम से इनके लिए रियल एस्टेट का काम देखते हैं। दीपक पाटील ने एसआईटी से मांग की है कि दान राशि के धन-प्रवाह मनी ट्रेल की विस्तृत जांच की जाए इन लोगों द्वारा खरीदी गई संपत्तियों की जांच हो, यदि अनियमितता मिले तो दोषियों पर कार्रवाई हो उन्होंने कहा कि यदि एसआईटी आवश्यक समझे तो मैं संबंधित संपत्तियों एवं दस्तावेजों का विवरण देने को तैयार हूं। संस्थाओं में विश्वसनीयता भी बड़ी बात है। और धार्मिक संस्थाओं की विश्वसनीयता उनकी आध्यात्मिक शक्ति के साथ-साथ उनकी प्रशासनिक पारदर्शिता से भी बनती है। यदि किसी ट्रस्ट या उसके पदाधिकारियों के विरुद्ध गंभीर शिकायतें आती हैं, तो सबसे पहले ईमानदारी से निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

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