सूफी खान
इराक के नजफ शहर की सड़कों पर दूर-दूर तक जनसैलाब उमड़ा हुआ था। हर तरफ अपने रहबर के जनाजे के दीदार की आस में लोग खड़े थे। नजफ से ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई का जनाजा कर्बला ले जाया जा रहा था। तस्वीरों और वीडियो में दिखाई दिया कि जनाजे के साथ चल रहे लोग अपने साथ लाया हुआ सफेद कपड़ा ताबूत वाले वाहन में मौजूद स्वयंसेवकों को दे रहे थे। स्वयंसेवक उस कपड़े को जनाजे से स्पर्श कराकर वापस उसी व्यक्ति को लौटा रहे थे। यह सफेद कपड़ा दरअसल कफन था, जिसे लोग अपने साथ इसलिए लाए थे ताकि उसे अपने रहबर के जनाजे से स्पर्श कराकर जीवन भर एक यादगार और आस्था के प्रतीक के रूप में अपने पास रख सकें। जानकारों के अनुसार, आयतुल्लाह अली खामेनेई केवल ईरान के सुप्रीम लीडर ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के करोड़ों शिया मुसलमानों के लिए एक बड़े रूहानी पेशवा भी माने जाते थे। यही वजह है कि उनके जनाजे से स्पर्श किए गए कफन को लोग अपने लिए बेहद पवित्र मान रहे थे।
कुछ ऐसा ही दृश्य ३ जून १९८९ को भी देखने को मिला था, जब ईरान के पहले सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी का अंतिम संस्कार हुआ था। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार, वह दुनिया के सबसे बड़े अंतिम संस्कारों में से एक था। उस समय श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ताबूत तक पहुंचने के लिए बैरिकेड्स तोड़ बैठी थी और कफ़न का एक टुकड़ा पाने की होड़ मच गई थी। हालात इतने बिगड़ गए थे कि अंतत: आयतुल्लाह खुमैनी के ताबूत को हेलीकॉप्टर से सुरक्षित स्थान पर ले जाना पड़ा।
बताया जा रहा है कि इस बार उस घटना से सबक लेते हुए ऐसी व्यवस्था की गई कि श्रद्धालुओं की आस्था भी बनी रहे और अव्यवस्था भी न पैâले। यही कारण था कि स्वयंसेवक लोगों के कफन के कपड़े को जनाजे से स्पर्श कराकर वापस लौटाते रहे। अमेरिकी प्रभाव वाले इराक में आयतुल्लाह अली खामेनेई का जनाजा पहुंचना इसलिए भी खास माना गया, क्योंकि ईरान और इराक के बीच आठ वर्ष तक युद्ध चला था। उस युद्ध के अधिकांश समय आयतुल्लाह अली खामेनेई ईरान के राष्ट्रपति थे। इसके बावजूद इराक में बड़ी संख्या में लोगों ने उनके प्रति सम्मान और श्रद्धा व्यक्त की। जानकारों का मानना है कि इसमें इमाम हुसैन के प्रति साझा आस्था की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
गुरुवार को मशहद में आयतुल्लाह अली खामेनेई का अंतिम संस्कार कर दिया गया। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच उनका अंतिम संस्कार संपन्न हो गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच तनाव अभी समाप्त नहीं हुआ है। उनका कहना है कि जब तक ईरान की शर्तों के अनुरूप कोई समझौता नहीं होता, तब तक टकराव की स्थिति बनी रह सकती है।
