सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र को लेकर महाविकास आघाडी के नेताओं ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि यह सत्र केवल ९७ हजार करोड़ रुपए की अनुपूरक मांगों को मंजूरी दिलाने और जल्दबाजी में विधेयक पारित कराने के लिए आयोजित किया गया था। उनका कहना था कि सरकार ने जनता के मूल मुद्दों और लोकतांत्रिक परंपराओं की अनदेखी की।
पत्रकार कक्ष में आयोजित संयुक्त पत्रकार वार्ता में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता जयंत पाटील, शिवसेना विधायक भास्कर जाधव और कांग्रेस नेता नाना पटोले ने सरकार के कामकाज और कथित भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर आरोप लगाए।
हिंदू देवस्थान ट्रस्टों की हजारों एकड़ भूमि पर अवैध कब्जे का बड़ा रैकेट सक्रिय
संयुक्त पत्रकार वार्ता में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता जयंत पाटील, शिवसेना विधायक भास्कर जाधव और कांग्रेस नेता नाना पटोले ने कहा कि विपक्ष के सभी दलों में पूरा समन्वय है और किसी प्रकार का मतभेद नहीं है।
जयंत पाटील ने आरोप लगाया कि राज्य में हिंदू देवस्थान ट्रस्टों की हजारों एकड़ भूमि पर अवैध कब्जा करने का एक बड़ा रैकेट सक्रिय है। उन्होंने कहा कि इस मामले में राजस्व मंत्री ने विस्तृत जांच का आश्वासन दिया है। उन्होंने यह भी मांग की कि अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े विवादों का अध्ययन करने के बाद ही सरकार रामटेक मंदिर से संबंधित विधेयक लाए। साथ ही उन्होंने कहा कि ‘लाड़ली बहन’ योजना के लाभार्थियों की संख्या घटाए जाने से महिलाओं में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ी है। भास्कर जाधव ने आरोप लगाया कि सरकार को लोकतंत्र और जनहित के मुद्दों से कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने कहा कि सत्र के अंतिम दिन जल्दबाजी में कई विधेयक पारित कराए गए। उन्होंने ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि यह परियोजना भ्रष्ट व्यवस्था की भेंट चढ़ गई। जाधव ने यह भी कहा कि सरकार स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर को भारत रत्न देने की बात भूल गई है और केवल विधायक, सांसद तथा राजनीतिक दलों के चुनाव चिह्न छीनने में व्यस्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि भगवान श्रीराम के नाम पर राजनीति करने वालों ने श्रीराम मंदिर के १,४०० करोड़ रुपये के कथित घोटाले को अंजाम दिया।
