सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई महानगर क्षेत्र में बारिश ने एक बार फिर सरकारी तैयारियों और बिजली व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी है। वसई-विरार में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं के बीच महावितरण का बिजली वितरण नेटवर्क बुरी तरह चरमरा गया। हालात ऐसे बने कि ९१ बिजली के खंभे धराशायी हो गए, ५२८ ट्रांसफॉर्मर बाढ़ के पानी में डूब गए और उनमें से ६२ पूरी तरह नष्ट हो गए। इस नुकसान से महावितरण को एक करोड़ रुपए के नुकसान होने का अनुमान है।
बिजली लाइनों पर पेड़ और उनकी शाखाएं गिरने से कई इलाकों की विद्युत आपूर्ति घंटों ठप रही। बारिश के बीच अंधेरे में डूबे नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। बार-बार यह सवाल भी उठ रहा है कि हर वर्ष मानसून से पहले तैयारियों के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, फिर पहली ही बारिश में बिजली व्यवस्था क्यों जवाब दे देती है?
नावों का लेना पड़ा सहारा
हालांकि, महावितरण का दावा है कि पिछले पांच दिनों की बारिश से प्रभावित दो लाख से अधिक उपभोक्ताओं की बिजली आपूर्ति बाढ़ का पानी उतरने के बाद लगभग ६५० कर्मचारियों की टीम ने युद्धस्तर पर काम करते हुए अगले १२ घंटों में बहाल कर दी। विभाग के कर्मचारियों को जलमग्न क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ा तथा पानी में डूबे बिजली उपकरणों और भूमिगत केबलों की सुरक्षा जांच के बाद ही आपूर्ति शुरू की गई।
महावितरण की नागरिकों से अपील
इस बीच महावितरण ने नागरिकों से अपील की है कि टूटे हुए बिजली के तारों, झुके या गिरे हुए खंभों तथा क्षतिग्रस्त विद्युत उपकरणों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें और ऐसी किसी भी घटना की सूचना तत्काल नियंत्रण कक्ष या हेल्पलाइन पर दें, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।
