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मुंबई मसाला : सीने तक सैलाब, कंधों पर उम्मीद!..पालघर की बाढ़ में गूंजी किलकारी…इंसानियत ने जीती जिंदगी की जंग

जेदवी

कहते हैं ‘मुंबई का मानसून’ अपनी मर्जी का मालिक होता है। जब बरसता है तो जिंदगी की रफ्तार पर ब्रेक लगा देता है। कुछ ऐसा ही रोंगटे खड़े कर देने वाला नजारा पालघर के केलवे इलाके में देखने को मिला, जहां आसमानी आफत और इंसानी जज्बे के बीच एक ऐसी जंग देखने को मिली, जिसने हर देखने वाले की आंखें नम कर दीं। लेकिन पालघर के केलवे गांव में कुदरत के इसी कहर के बीच इंसानियत ने ऐसा साहस दिखाया कि बाढ़ के सन्नाटे में एक नवजात की पहली किलकारी गूंज उठी। यह सिर्फ एक बचाव अभियान नहीं, बल्कि हौसले, एकजुटता और मानवता की मिसाल बन गया।
८ और ९ जुलाई को हुई मूसलाधार बारिश ने केलवे रोड के हनुमानपाड़ा इलाके को चारों ओर से पानी में घेर लिया। सड़कें लापता थीं और कई जगह सीने तक पानी भर चुका था। इसी दौरान गर्भवती प्रियंका रवि यादव को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। परिजनों ने तुरंत एंबुलेंस बुलाई, लेकिन उफनते पानी और डूबी हुई सड़कों ने एंबुलेंस के पहियों को गांव की सीमा पर ही रोक दिया। हर गुजरता पल मां और गर्भस्थ शिशु, दोनों के लिए खतरा बनता जा रहा था।
संकट में आगे आए फरिश्ते
जब हालात के आगे सरकारी व्यवस्था बेबस नजर आई, तब गांव के लोग किसी फरिश्ते की तरह आगे आए। आशा वर्कर, स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता दिव्या घरात, चेतन गावड़ और गांव के कई युवाओं ने बिना एक पल गंवाए जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली। उन्होंने एक लकड़ी के दरवाजे को ही अस्थायी स्ट्रेचर में बदल दिया और प्रियंका को उस पर लिटाकर सीने तक भरे पानी में उतर गए।
अस्पताल पहुंची प्रियंका
अस्पताल पहुंचने के कुछ ही समय बाद प्रियंका यादव ने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया। सबसे बड़ी राहत यह रही कि मां और नवजात दोनों पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ हैं। बाढ़ के बीच जन्मी यह किलकारी पूरे इलाके के लिए उम्मीद की आवाज बन गई।
इंसानियत ने बचाया जीवन
पालघर की यह घटना याद दिलाती है कि संकट की घड़ी में सबसे बड़ी ताकत सिर्फ मशीनें या सरकारी तंत्र नहीं, बल्कि इंसानियत होती है। जब रास्ते डूब जाते हैं, तब लोगों का हौसला पुल बन जाता है। सीने तक भरे पानी के बीच जिन कंधों ने एक मां को सहारा दिया, उन्हीं कंधों ने एक नई जिंदगी को भी सुरक्षित दुनिया तक पहुंचा दिया।
धाराओं को चीर कर एंबुलेंस तक पहुंचे
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिखाई देता है कि तेज बहाव, गहरे गड्ढों और हर कदम पर मंडराते खतरे के बावजूद ग्रामीण पीछे नहीं हटे। पानी की धाराओं को चीरते हुए वे धीरे-धीरे मुख्य सड़क तक पहुंचे, जहां एंबुलेंस उनका इंतजार कर रही थी। आखिरकार प्रियंका को सुरक्षित सफाले ग्रामीण अस्पताल पहुंचा दिया गया।

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