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रोखठोक : हिंदू राष्ट्र की झलक

संजय राऊत

मूसलाधार बारिश में ६,७०० करोड़ रुपए की लागत में बना ‘कनेक्टिंग लिंक’ टनल ढह गया और टपकने लगा। विपक्ष ने इस पर तीखी आलोचना की, लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने जवाब दिया, ‘‘तेज हवाओं और लगातार बारिश की वजह से ऐसा हुआ।’’ सरकार कितना झूठ बोलती है, यह इसी से पता चलता है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री. फडणवीस क्या कहेंगे? ‘‘विपक्ष महाराष्ट्र की बदनामी कर रहा है। राज्य की बदनामी करने वालों को नहीं छोड़ेंगे!’’ विपक्ष ने भ्रष्टाचार उजागर किया तो इसमें बदनामी कहां हुई? महाराष्ट्र के विधायक-सांसद ५०-५० करोड़ में बिक गए, यह बदनामी नहीं है तो क्या भगवान की पुष्पवृष्टि है? ७० दिन में कनेक्टिंग टनल का टपकना कोई गर्व की बात नहीं है। अयोध्या का राम मंदिर तो उद्घाटन के २६वें दिन ही टपकने लगा, तब कनेक्टिंग लिंक के गिरने पर क्या कहा जाए? महाराष्ट्र समेत देश में १०० साल पुरानी इमारतें आज भी ‘तनकर’ खड़ी हैं। मुख्यमंत्री, मंत्रियों के बंगले बारिश में नहीं ढहते और न टपकते हैं। अंग्रेजों के जमाने में और उसके बाद बने कई बांध, प्रकल्प मजबूती से ख़ड़े हैं। क्योंकि उन सभी प्रोजेक्ट्स में किसी ने पैसा नहीं खाया। क्या आज ऐसा कहा जा सकता है? ६,७०० करोड़ का मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का ‘कनेक्टिंग लिंक’ सिर्फ ६७ दिन में जर्जर हो गया। ६,७०० करोड़ में कितना भ्रष्टाचार, कितना गबन हुआ और उस गबन में किसको कितना हिस्सा मिला, इसका ऑडिट हो तो सरकार का हर घटक कितने प्रतिशत पर काम करता है, इसका खुलासा हो जाएगा। आज अपने देश के सामने सबसे बड़ा संकट नैतिकता का है। किसी को किसी बात की शर्म नहीं रही। पहले कहा जाता था कि राजनेताओं को शर्म नहीं है। अब जजों को भी शर्म नहीं रही। सरकार की चमचागीरी करने और विपक्ष की आवाज दबाने की मानो होड़ ही जजों में लगी हुई है। ये जज सरकार की राजनीति के मोहरे बनते हैं और फिर मंच पर आकर नैतिकता की बातें करते हैं। इन पर कौन विश्वास करेगा?
मोदी विदेश में
प्रभु श्रीराम मंदिर की लूट से हड़कंप मचा हुआ है और इसी समय प्रधानमंत्री मोदी फिर से तीन देशों के विदेश दौरे पर चले गए हैं। भारत में सवालों का पहाड़ खड़ा होने के बीच मोदी परदेश जाकर क्या करते हैं? जैसे ही कोई देश उन्हें पुरस्कार या मेडल देने की बात करता है, मोदी वहां दौड़ पड़ते हैं, ऐसी खिल्ली उनकी अब विश्वस्तर पर उड़ाई जा रही है। जिनका कोई अस्तित्व ही नहीं है, ऐसे पुरस्कार या मेडल्स कुछ देशों ने मोदी के गले में डाल दिए। यह भारतीय प्रतिष्ठा पर ‘चूना’ लगाने जैसा है। दुनिया का एक भी प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रधानमंत्री मोदी को नहीं मिला है। कई फालतू पुरस्कार लेने के लिए मोदी विदेश दौरा करते हैं और जनता की तिजोरी पर भार डालते हैं। मोदी ने देश या समाज के लिए ऐसा कौन सा काम किया है कि उन्हें पुरस्कार मिले? सोनम वांगचुक जैसे महान सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले १० दिनों से अनशन कर रहे हैं। ‘नीट’ पेपर लीक से लाखों छात्रों का जीवन बर्बाद हो गया। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इसके लिए जिम्मेदार हैं। उन्हें मंत्रिमंडल से हटाने की मांग को लेकर यह अनशन है, लेकिन मोदी ने वांगचुक के अनशन की सुध तक नहीं ली। उल्टा धर्मेंद्र प्रधान को बचाने का काम जारी रखा है। शैक्षणिक क्षेत्र में पूरी तरह से mess हो गया है और भारतीय विश्वविद्यालयों की डिग्रियों को दुनिया में कोई महत्व नहीं देता। मोदी मंत्रिमंडल के ज्यादातर मंत्रियों के बच्चे विदेश में पढ़ रहे हैं और वहीं बस गए हैं इसलिए भारतीय डिग्रियों के अवमूल्यन का असर उन पर नहीं पड़ता। मोदी सरकार के कार्यकाल में रुपए का अवमूल्यन हुआ, लेकिन मोदी के कारण दुनिया में भारत का मान बढ़ा, यह दावा भी ‘कनेक्टिंग लिंक’ के ढहने से गिर गया है। ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स में भारत के पासपोर्ट की रैंकिंग गिर गई है। पासपोर्ट की रैंकिंग में भारत पहले १०० में भी जगह नहीं बना पाया। पासपोर्ट इंडेक्स में भारत १२५वें स्थान पर है यानी ‘नीचे से’ थोड़ा ऊपर, ऐसा ही कहना होगा। मोदी २०१४ में सत्ता में आए थे, तब भारत का पासपोर्ट ७६वें स्थान पर था। आज उसकी धज्जियां उड़ गई हैं! मुख्यमंत्री अब महाराष्ट्र की बदनामी की बात करने लगे हैं, लेकिन उनके कार्यकाल में महाराष्ट्र की भारी गिरावट शुरू है। महाराष्ट्र अब सुजलाम् सुफलाम् नहीं रहा। राज्य की समृद्धि भी रसातल में चली गई। अमीर राज्यों की सूची में गुजरात महाराष्ट्र से आगे निकल गया और महाराष्ट्र टॉप ५ में भी नहीं है। इसका मतलब है कि आर्थिक रूप से महाराष्ट्र पिछड़ गया है। प्रति व्यक्ति आय के मामले में भी महाराष्ट्र दूसरे राज्यों की तुलना में पीछे रह गया है। यह बदनामी तो विश्व बैंक ने की है और फडणवीस उसका ठीकरा विपक्ष पर फोड़ रहे हैं।
गायों के नाम पर भी लूट
फडणवीस के मंत्रिमंडल में कुछ लोग बीच-बीच में हिंदू राष्ट्र का राग अलापते रहते हैं। इन लोगों को जैसा हिंदू राष्ट्र चाहिए, उसकी झलक अभी अयोध्या में दिखाई दे रही है। देव, धर्म और राष्ट्र को लूटने वालों को खुला संरक्षण देने वाला एक हिंदू राष्ट्र अभी अयोध्या में चल रहा है। हिंदुत्व के नाम पर ये लोग वैâसे लूट करते हैं, इसका उदाहरण भाजपा शासित राजस्थान में सामने आया। राज्य में ‘गोशालाओं’ को अनुदान मिलता है, इसलिए कई नकली हिंदुत्ववादियों ने नकली गोशालाएं खोलकर सरकार से करोड़ों रुपए का अनुदान लूट लिया। इनमें से ज्यादातर गोशालाएं श्रीराम और श्रीकृष्ण के नाम पर हैं। भ्रष्टाचार की हद तो ये है कि मरी हुई गायों को कागजों पर ‘जिंदा’ दिखाकर इन गोशालाओं ने लगभग सौ करोड़ का अनुदान लूट लिया। ये सारी गड़बड़ी महालेखाकार के ऑडिट में साफ हो गई। एक तरफ गाय को गोमाता का दर्जा देने की मांग करो। गोवंश हत्या विरोधी कानून बनाओ। ‘बीफ’ बेचने वालों की हत्या करो, भीड़ द्वारा पीट-पीट कर मारो और उसी समय गायों के नाम पर फर्जी तरीके से अनुदान लूटो। प्रयागराज के कुंभ मेले के हिसाब में भी गड़बड़ी है। अब नासिक के कुंभ मेले का सरकारी खजाना लूटा जाएगा। उसमें गुजरात के ठेकेदार हाथ साफ करेंगे। नासिक के कुंभ मेले की जिम्मेदारी देवेंद्र फडणवीस के ‘चंपतराय’ गिरीश महाजन को सौंपी गई है। ऐसे में गोदावरी को भी झटका लगा होगा। हिंदुत्व और धर्म अब लूट का साधन बन गए हैं।
कब्जा किसका?
देश के सभी प्रमुख मंदिरों पर भारतीय जनता पार्टी ने कब्जा कर लिया है। मंदिरों की ट्रस्ट संस्थाओं में अब सीधी राजनीतिक नियुक्तियां होती हैं। शिर्डी के साईबाबा संस्थान में तो ट्रस्ट ही नहीं है और हाई कोर्ट के जरिए मंदिर का कामकाज चलता है, लेकिन साईबाबा से भी ऊपर वहां राधाकृष्ण विखे का हुक्म चलता है। मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर की कमान भाजपा ने त्रिपाठी नामक व्यक्ति को दी है। ये त्रिपाठी मंगल प्रभात लोढ़ा के खास हैं। महाराष्ट्र साहित्य परिषद, एशियाटिक लाइब्रेरी जैसी सार्वजनिक साहित्य संस्थाओं को लोकतांत्रिक तरीके से भाजपा ने लिया है, यह दावा झूठा है। इन संस्थाओं पर भी हिंदू राष्ट्र स्थापित हो, इसके लिए बिल्डर, धर्मादाय आयुक्त और अदालतों का अमूल्य सहयोग इस मंडली को मिला है। लोकसभा, विधानसभा और सार्वजनिक संस्थाओं में भी विरोधी विचार के लोग नहीं रखे जाएंगे। विरोध करने वालों को या तो खरीद लो या सीधे खत्म कर दो। पुलिस और जांच एजेंसियों का खुलकर इस्तेमाल करो यही भाजपा के नए हिंदू राष्ट्र का सूत्र है। अब अदालतों में भी संघ की शाखाएं बन गई हैं। चुनाव आयोग ने तो कब की हाफ चड्डी पहन ली है। इसलिए दल-बदल, पार्टी तोड़ने के मामले में फैसला नहीं देना है, यह पहले ही तय कर लिया गया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ तो कोई फैसला ही नहीं है। चर्चिल ने कहा था कि भारत के लोग अपनी आजादी बेचकर खा जाएंगे, वो अब सच लगने लगा है। भाजपा प्रणीत हिंदू राष्ट्र की यही झलक है।

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