मुख्यपृष्ठनए समाचारकानून पारित हुआ, लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी...बिल्डर या जमीन मालिक से...

कानून पारित हुआ, लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी…बिल्डर या जमीन मालिक से डरें नहीं खाली नहीं करें घर… आदित्य ठाकरे ने सेस इमारतों के टेनेंट से की अपील… कहा, नोटिस मिलने पर तुरंत शिवसेना से संपर्क करें

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र विधान परिषद में महाराष्ट्र आवास एवं क्षेत्र विकास (संशोधन) विधेयक, २०२६ पारित होने के बाद हजारों उपकर प्राप्त अर्थात सेस इमारतों के पुनर्विकास का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है। हालांकि, यह मामला अभी न्यायालय में लंबित है और इसकी अगली सुनवाई २० जुलाई को निर्धारित है। ऐसे में शिवसेना नेता, युवासेनाप्रमुख व विधायक आदित्य ठाकरे ने उपकर प्राप्त इमारतों में रहनेवाले किरायेदारों से अपील की है कि यदि इस बीच कोई बिल्डर या जमीन मालिक उन्हें मकान खाली करने के लिए कहे तो वे डरें नहीं और किसी भी परिस्थिति में घर खाली न करें।
आदित्य ठाकरे ने कहा कि यदि किसी बिल्डर या जमीन मालिक की ओर से मकान खाली करने का नोटिस दिया जाता है तो प्रभावित निवासी तुरंत शिवसेना से संपर्क करें। शनिवार को ‘मातोश्री’ में आयोजित पत्रकार सम्मेलन में आदित्य ठाकरे इस संशोधन विधेयक पर शिवसेना का पक्ष रखते हुए बोल रहे थे। उन्होंने बताया कि मुंबई में लगभग १४,५०० उपकर प्राप्त अर्थात सेस-पगड़ी इमारतें हैं, जिनमें हजारों परिवार रहते हैं। इनमें से अनेक इमारतें ६० से १०० वर्ष पुरानी हो चुकी हैं और उनकी मरम्मत तथा पुनर्विकास अत्यंत आवश्यक है। आदित्य ठाकरे ने कहा कि वर्ष २०२१ में महाविकास आघाड़ी सरकार के दौरान यह कानून लाया गया था। इसके तहत पहले छह महीने तक जमीन मालिक को और उसके बाद उसी इमारत के किरायेदारों को पुनर्विकास का अधिकार देने का प्रावधान किया गया था।
सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों को मुंबई में मिले घर
मुंबई में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में पुलिस आवास उपलब्ध हैं। राज्य सरकार ने वर्तमान में कार्यरत पुलिसकर्मियों को बड़े आवास उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है, जो स्वागत के योग्य है। लेकिन जिन पुलिसकर्मियों ने वर्षों तक मुंबई और मुंबईकरों की सुरक्षा के लिए अपनी सेवाएं दीं, जिनके परिवारों की तीन-तीन पीढ़ियां पुलिस सेवा में रहीं, उन सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों को भी मुंबई में स्थायी और अधिकारयुक्त घर उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
तत्कालीन राज्यपाल ने लटकाया विधेयक
उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा और विधान परिषद से विधेयक पारित होने के बावजूद तत्कालीन राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने इसे दो वर्ष बाद राष्ट्रपति के पास भेजा। अब जाकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यकाल में इस कानून को मंजूरी मिली। आदित्य ठाकरे ने कहा कि कानून पारित होने के बाद जमीन मालिकों और जर्जर इमारतों के कुछ निवासियों ने इस मामले को अदालत में चुनौती दी। उन्होंने बताया कि इस कानून को लागू कराने के लिए तत्कालीन महाविकास आघाड़ी सरकार, विधायक अजय चौधरी, मनोज जामसुतकर तथा मुंबई के अन्य जनप्रतिनिधियों ने लगातार प्रयास किए। उनका कहना था कि यदि उस समय सक्षम प्राधिकरण का गठन कर दिया गया होता, तो यह मामला इतने लंबे समय तक न्यायालय में लंबित नहीं रहता। उन्होंने यह भी कहा कि जो विधेयक अब पारित हुआ है, उसे दो वर्ष पहले ही लागू हो जाना चाहिए था।

अन्य समाचार