श्रीकिशोर शाही
(अय्याश प्रिंस-७)
१५ बिलियन डॉलर की लूट और दुनिया के सबसे शर्मनाक स्कैंडल्स में से एक का अंत वैसा नहीं हुआ, जैसा फिल्मों में होता है। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, आखिरकार सुल्तान और जेफ्री के बीच एक समझौता हुआ। जेफ्री को अपनी जान और आजादी बचाने के लिए अपनी सारी संपत्तियां ब्रुनेई सरकार को सौंपनी पड़ीं।
लंदन में एक विशाल शाही नीलामी का आयोजन किया गया, जो महीनों तक चली। यह नीलामी जेफ्री के खोखले अहंकार का प्रतीक थी। उसके सोने के सोफे, हजारों डिजाइनर घड़ियां, ग्रैंड पियानो और रोल्स रॉयस जैसी गाड़ियां कौड़ियों के भाव नीलाम कर दी गर्इं। यॉट ‘टिट्स’ जिसे उसने शान से बनवाया था, उसे भी बेच दिया गया। जिस जेप्रâी ने दुनियाभर में अरबों डॉलर बहाए थे, उसे ब्रुनेई से निर्वासित कर दिया गया।
लेकिन यह कहानी का सबसे कड़वा सच है, सिस्टम हमेशा ताकतों के आगे झुक जाता है। १५ बिलियन डॉलर चुराने और अनगिनत लड़कियों का शोषण करने के बावजूद, जेफ्री को कभी जेल की हवा नहीं खानी पड़ी। अगर यही अपराध किसी आम इंसान ने किया होता, तो वह अपनी पूरी जिंदगी कालकोठरी में सड़ा देता।
आज, जेप्रâी लंदन और पेरिस के महंगे अपार्टमेंट्स में एक लग्जरी जीवन जी रहा है। हालांकि, उसके पास अब ९० के दशक जैसी अंधी दौलत नहीं है, लेकिन वह अभी भी एक बेहद अमीर इंसान है। ब्रुनेई के खजाने से लूटे गए उन १५ बिलियन डॉलर्स का एक बड़ा हिस्सा कभी वापस नहीं मिल पाया।
प्रिंस जेफ्री की यह कहानी ‘स्कैम एंड स्कैंडल्स’ के इतिहास में एक डार्क चैप्टर है। यह दिखाती है कि जब इंसान के पास असीमित पैसा और सत्ता आ जाती है, तो वह कैसे खुद को भगवान समझने लगता है। जेफ्री का बुंगा-बुंगा स्कैंडल सिर्फ एक इंसान की हवस की कहानी नहीं, बल्कि यह न्याय व्यवस्था और सत्ता के उस खोखलेपन का सबूत है, जहां बड़े अपराधी हमेशा सजा से बच निकलते हैं।
(समाप्त)
