अनिल मिश्र / पटना
बिहार के गया जिले के वजीरगंज प्रखंड के केनार चट्टी गांव में रविवार को ऐसा भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला, जिसने पूरे गांव के लोगों की आंखें नम कर दीं। करीब 31 साल पहले, यानी वर्ष 1995 में रहस्यमय ढंग से लापता हुए साधु शर्मा अचानक अपने पैतृक घर लौट आए। उनकी वापसी की खबर मिलते ही परिवार में खुशियों की लहर दौड़ गई और पूरे गांव में यह घटना चर्चा का विषय बन गई।
रविवार को जब साधु शर्मा अचानक अपने घर पहुंचे तो वर्षों से बिछड़े बेटे को सामने देखकर परिजन भावुक हो उठे। मां की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े, जबकि भाई-बहनों और अन्य रिश्तेदारों ने उन्हें गले लगाकर अपना स्नेह जताया। देखते ही देखते यह खबर पूरे गांव में फैल गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण उनके घर पहुंचने लगे।
जैसे ही साधु शर्मा घर पहुंचे, उनकी बड़ी भाभी देवंती देवी भावुक होकर उनके गले से लिपट गईं और रो पड़ीं। परिवार के अन्य सदस्यों की आंखों में भी खुशी के आंसू छलक आए। 31 साल की लंबी प्रतीक्षा के बाद यह पुनर्मिलन का क्षण किसी चमत्कार से कम नहीं था। देवंती देवी ने कहा कि उनकी आंखें इंतजार में पथरा गई थीं, लेकिन भगवान ने चमत्कार कर दिया।
साधु शर्मा के लापता होने के दुख में पहले उनके पिता गनौरी ठाकुर का निधन हो गया। कुछ वर्ष पहले उनकी मां कलसिया देवी भी बेटे की याद में इस दुनिया से चली गईं। साल दर साल बीतने के साथ परिवार और गांव वालों ने उनकी जीवित वापसी की उम्मीद छोड़ दी थी। हर तरफ खोजबीन के बावजूद कोई सुराग नहीं मिलने से उन्हें मृत मान लिया गया था।
साधु शर्मा अप्रैल 1995 में शादी के महज दो महीने बाद कमाने के लिए घर से निकले थे। शुरुआत में उनकी दो-तीन चिट्ठियां आईं, लेकिन उसके बाद उनका कोई अता-पता नहीं चला। परिवार ने रिश्तेदारों और परिचितों के जरिए खोजबीन की तथा दूसरे राज्यों तक तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। समय के साथ उम्मीदें धुंधली पड़ती गईं।
फिलहाल, 31 वर्षों तक साधु शर्मा कहां रहे और किन परिस्थितियों में परिवार से दूर रहे, इसका खुलासा अभी नहीं हो सका है। उनकी रहस्यमयी गुमशुदगी और अचानक घर वापसी पूरे इलाके में कौतूहल का विषय बनी हुई है। परिवार के लिए यह दिन तीन दशक से भी अधिक लंबे इंतजार के बाद मिली सबसे बड़ी सौगात बन गया है।
