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जेपीएससी-जेएसएससी पर भाजपा एवं बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा और रघुवर दास को बोलने का नैतिक अधिकार नहीं, पहले अपने शासनकाल की भर्ती विवादों पर जवाब दें, फिर युवाओं के भविष्य की बात करें- विजय शंकर नायक

अनिल मिश्र / रांची

बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा और रघुवर दास को जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती मामलों पर उपदेश देने से पहले अपने शासनकाल के दौरान भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों, किए गए भ्रष्टाचार और नियुक्ति घोटालों पर जनता के सामने जवाब देना चाहिए। यह उक्त बातें झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने कही। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में भर्ती प्रक्रिया पर लगातार गंभीर सवाल उठे, जिससे लाखों अभ्यर्थियों का विश्वास डगमगाया।
उन्होंने कहा कि आज भाजपा युवाओं की हितैषी बनने का प्रयास कर रही है, जबकि उसके शासनकाल में भर्ती परीक्षाओं को लेकर व्यापक विवाद, भ्रष्टाचार के मामले और पैसा-पैरवी लेकर नियुक्तियां किए जाने के मामले सामने आए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों तक अभ्यर्थियों ने पारदर्शिता, निष्पक्षता और समयबद्ध नियुक्तियों की मांग को लेकर संघर्ष किया। भाजपा के नेता अब दूध के धुले और राजा हरिश्चंद्र बनने की नौटंकी कर रहे हैं।
विजय शंकर नायक ने कहा कि बाबूलाल मरांडी और अर्जुन मुंडा के कार्यकाल में प्रथम और द्वितीय जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा (2000-08) से जुड़े मामले में अनियमितताओं के आरोपों की सीबीआई जांच हुई। उन्होंने कहा कि इस मामले में तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष डॉ. दिलीप कुमार प्रसाद सहित सभी सदस्यों के विरुद्ध कार्रवाई हुई तथा वर्ष 2024 में सीबीआई ने 60 आरोपियों के विरुद्ध आरोपपत्र दायर किया था।
उन्होंने कहा कि अर्जुन मुंडा के कार्यकाल में जेपीएससी की दूसरी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा (2004) में 172 पदों के लिए परीक्षा हुई। प्रारंभिक परीक्षा में नियमानुसार 1,720 अभ्यर्थी सफल होने चाहिए थे, लेकिन आयोग ने 16,314 को सफल घोषित कर दिया। मुख्य परीक्षा में भी नियमानुसार अधिकतम 516 अभ्यर्थी सफल होने चाहिए थे, लेकिन 804 को सफल घोषित किया गया।
सीबीआई ने दूसरी सिविल सेवा परीक्षा की कॉपियों की जांच कर जो रिपोर्ट सौंपी, उसमें स्पष्ट है कि किस प्रकार ओएमआर शीट में गड़बड़ी की गई। सीबीआई ने बताया कि जिन लोगों ने ओएमआर शीट में कम गोले भरे, उन्हें भी भरपूर अंक दिए गए। गोपाल सिंह, जो जेपीएससी के तत्कालीन सदस्य थे, उनके बेटे कुंदन कुमार सिंह ने ओएमआर में सिर्फ 19 गोले भरे थे, लेकिन परिणाम में उन्हें 88 अंक दे दिए गए। अंत में उनका चयन भी हो गया। ऐसा ही कई कॉपियों में पाया गया। ऐसे में यह तय है कि जिन्हें नौकरी मिल गई है, वह भी बचेगी या नहीं, यह सवालों के घेरे में है।
उन्होंने कहा कि यह मामला झारखंड की भर्ती व्यवस्था पर लंबे समय तक प्रश्नचिह्न बना रहा। उन्होंने कहा कि प्रथम जेपीएससी परीक्षा के समय भी विवाद उठे थे, जबकि रघुवर दास सरकार के कार्यकाल में भी जेपीएससी और जेएसएससी की कई भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर अभ्यर्थियों ने विरोध दर्ज कराया। उनके अनुसार, भाजपा को पहले इन सवालों पर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।
प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि यदि भाजपा वास्तव में युवाओं के साथ खड़ी है, तो उसे अपने शासनकाल की सभी भर्ती प्रक्रियाओं पर सार्वजनिक जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक आरोप लगाने से युवाओं का विश्वास वापस नहीं आएगा। ये वही लोग हैं जिन्होंने जेपीएससी और जेएसएससी में भ्रष्टाचार और नियुक्ति घोटालों का बीजारोपण करने का कार्य किया था। आज “सूप बोले तो बोले, चलनी भी बोले जिसमें बहत्तर छेद” वाली कहावत चरितार्थ हो रही है।
उन्होंने कहा, “हेमंत सोरेन सरकार युवाओं की सच्ची रक्षक और न्याय की गारंटी है, जबकि भाजपा युवाओं की सबसे खूंखार दुश्मन, भ्रष्टाचार की जननी, लुटेरों की सरपरस्त और बेशर्म पार्टी साबित हुई है।”
विजय शंकर नायक ने साफ शब्दों में कहा कि वर्तमान हेमंत सोरेन सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाकर ठोस कार्रवाई की है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2024 की जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में पेपर लीक की खबर मिलते ही परीक्षा रद्द कर दी गई और एसआईटी जांच में कई गिरफ्तारियां हुईं। वर्ष 2026 की उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में पेपर लीक मामले में 159 अभ्यर्थियों समेत संगठित गिरोह के कई सदस्यों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा गया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मांग स्पष्ट है कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर गड़बड़ी करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध, चाहे उनका राजनीतिक या प्रशासनिक प्रभाव कुछ भी हो, निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
झारखंड कांग्रेस की मांग
* भाजपा शासनकाल सहित सभी विवादित जेपीएससी एवं जेएसएससी भर्ती मामलों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।
* दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, बिचौलियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
* भर्ती परीक्षाओं को पूर्णतः पारदर्शी, डिजिटल और पेपर लीक मुक्त बनाया जाए।
* युवाओं का विश्वास बहाल करने के लिए समयबद्ध और जवाबदेह भर्ती व्यवस्था लागू की जाए।

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