सामना संवाददाता / नई दिल्ली
बीके ई. वी. गिरीश ने वॉइस ऑफ वीएनपीएच- विश्व निशाने पर है, पर पहली बार सार्वजनिक रूप से 21 से 25 अगस्त तक ब्रह्माकुमारीज सोशल सर्विस विंग, माउंट आबू द्वारा भारत एवं नेपाल में आयोजित ‘राष्ट्रव्यापी विश्व बंधुत्व रक्तदान अभियान’ की घोषणा की। उन्होंने रक्तदान को मानवता और विश्व बंधुत्व की सर्वोच्च सेवा बताया।
बता दें कि वीएनपीएच जलवायु संकट जागरूकता अभियान द्वारा कारगिल विजय दिवस एवं विश्व मैंग्रोव दिवस के उपलक्ष्य में एक विशेष वैश्विक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारियों, रक्षा विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, पर्यावरणविदों एवं आध्यात्मिक नेतृत्व ने जलवायु-सचेत जीवनशैली, राष्ट्र सेवा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण ब्रह्माकुमारीज़ मुख्यालय, माउंट आबू से अंतरराष्ट्रीय वक्ता, प्रशिक्षक एवं नेतृत्व, भावनात्मक सशक्तिकरण तथा आध्यात्मिक चिंतन के प्रख्यात विशेषज्ञ बीके ई. वी. गिरीश रहे। उन्होंने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि “सच्चा विश्व बंधुत्व केवल विचारों से नहीं, बल्कि मानव जीवन बचाने वाली निःस्वार्थ सेवा से प्रकट होता है।”
इसी अवसर पर उन्होंने वॉइस ऑफ वीएनपीएच के मंच से पहली बार सार्वजनिक रूप से ब्रह्माकुमारीज़ सोशल सर्विस विंग, माउंट आबू द्वारा 21–25 अगस्त के दौरान भारत एवं नेपाल के प्रत्येक निकटतम ब्रह्माकुमारीज़ सेवा केंद्र पर आयोजित किए जाने वाले ‘राष्ट्रव्यापी विश्व बंधुत्व रक्तदान अभियान’ की घोषणा की। यह अभियान विश्व बंधुत्व दिवस के उपलक्ष्य में तथा दादी प्रकाशमणि जी की पावन स्मृति में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने सभी नागरिकों से इस महाअभियान में सहभागी बनकर रक्तदान के माध्यम से मानवता और विश्व बंधुत्व का संदेश देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में एयर मार्शल रवि कपूर, लेफ्टिनेंट जनरल शोकिन चौहान, वाइस एडमिरल पुनीत कुमार बहल, एयर मार्शल जी. एस. बेदी, लेफ्टिनेंट कर्नल कैलाश बंसल, लेफ्टिनेंट कर्नल मनोज कुमार सिन्हा (सेवानिवृत्त), लेफ्टिनेंट कर्नल निशा जोशी, कर्नल बी. वेंकट, मनोज ‘भावुक’ तथा अभियान के संस्थापक डॉ. निखिल कांत सहित अनेक विशिष्ट वक्ताओं ने अपने-अपने व्यक्तिगत सक्रिय जलवायु-सचेत आचरण साझा किए और पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का समापन ‘पोएटिक क्लाइमेटोलॉजी’ की प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसने रचनात्मक अभिव्यक्ति, आध्यात्मिक चेतना और व्यक्तिगत आचरण के माध्यम से जलवायु-सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का प्रेरक संदेश दिया।
