तेरे नयनों ने मुझे जब सहलाया
मेरे नयन तभी मुझसे रूठ गये
तेरे नयनों के लाल डोरे
मेरे चेहरे की लाली बन गये
तेरे हाथों की मरमरी छुअन से
मेरी कल्पनाएं अंबर छू गई
तेरे अधरों की हल्की सी मुस्कान
मेरे तन -मन को मादक कर रही
बरसे प्रेम के जब बादल
मन की बगिया खिल गई
क्षितिज पर दिखा इंद्रधनुष
हम विस्मित होकर देख रहे
हम दोनों की मौन स्वीकृति
परस्पर प्यार जता रही
जीवन में आने वाले कल की
जादुई झलक दिखा गई।
-बेला विरदी
