जेदवी
मुंबई की लोकल ट्रेन को शहर की जीवनरेखा कहा जाता है। रोज लाखों लोग अपनी मेहनत, समय और उम्मीदें लेकर रेलवे स्टेशनों पर पहुंचते हैं। लेकिन जब टिकट लेने पहुंचे यात्री को टिकट के बदले ‘मां’ की गाली मिले, तो यह सिर्फ एक कर्मचारी की बदजुबानी नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था पर सवाल बन जाता है।
क्या है मामला
आरोप है कि एमएसटी पास बनवाने आए एक यात्री से टिकट मांगने पर बुकिंग कर्मचारी ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। घटना के बाद यात्रियों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने कहा कि रेलवे का ग्राहक ही उसकी आय का सबसे बड़ा आधार है। ऐसे में यदि सरकारी कर्मचारी ही अपमानजनक भाषा बोले तो यह बेहद गंभीर है। मौके पर मौजूद लोगों ने कहा, ‘काम नहीं करना है तो इस्तीफा दे दो, लेकिन जनता को गाली देने का अधिकार किसी को नहीं है।’
रेलवे का पक्ष
रेलवे के अनुसार यात्री, एमएसटी पास बनवाने पहुंचा था। नियम के तहत बुकिंग कर्मचारी ने मूल पहचान पत्र मांगा, लेकिन यात्री ने उसे दिखाने से इनकार कर दिया और बिना दस्तावेज के पास जारी करने की जिद की। इसी दौरान दोनों में बहस हुई। आरपीएफ और जीआरपी ने मौके पर पहुंचकर मामला शांत कराया।
प्रशासन तय करे अपनी जिम्मेदारी
यात्रियों का कहना है कि यात्री रेलवे पर भरोसा कर टिकट खरीदता है, अपमान नहीं। यदि सेवा की जगह बदसलूकी मिलेगी तो आक्रोश स्वाभाविक है। अब रेलवे प्रशासन को तय करना है कि वह ऐसे मामलों में सख्त संदेश देगा या यात्रियों का सम्मान यूं ही दांव पर लगा रहेगा।
वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद आक्रोश और बढ़ गया। यात्रियों ने मांग की कि रेलवे प्रशासन दोषी कर्मचारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे और प्रâंटलाइन स्टाफ के लिए व्यवहार व जनसेवा का प्रशिक्षण अनिवार्य करे।
