उमेश गुप्ता / वाराणसी
सावन माह की शुरुआत से पहले ही धर्मनगरी काशी शिवमय हो गई है। बाबा श्री काशी विश्वनाथ के जलाभिषेक के लिए देश के विभिन्न राज्यों से कांवड़ियों का आगमन शुरू हो गया है। बुधवार को दशाश्वमेध समेत प्रमुख गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी और पूरा क्षेत्र ‘हर-हर महादेव’ व ‘बोलबम’ के जयघोष से गूंज उठा।
कांवड़िए गंगा स्नान के बाद पारंपरिक विधि से कांवर में गंगाजल भरकर श्री काशी विश्वनाथ धाम की ओर रवाना हुए। मंदिर जाने वाले मार्गों पर दिनभर भक्तों की आवाजाही बनी रही और शिवभक्ति का उत्साह देखने को मिला।
इस बीच, गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने सभी 84 घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी है। जल पुलिस लगातार निगरानी कर रही है और बैरिकेडिंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को गहरे पानी में जाने से रोका जा रहा है।
जलस्तर बढ़ने से नियमित गंगा स्नान करने वाले श्रद्धालुओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मणिकर्णिका घाट स्थित ऐतिहासिक रत्नेश्वर महादेव मंदिर भी गंगा के पानी में जलमग्न हो गया है। इसके बावजूद श्रद्धालु मंदिर के समीप पहुंचकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, बुधवार सुबह वाराणसी में गंगा का जलस्तर 60.94 मीटर दर्ज किया गया, जो फिलहाल स्थिर है। बलिया, गाजीपुर, प्रयागराज और मीरजापुर में भी जलस्तर स्थिर बना हुआ है, जबकि आजमगढ़ में जलस्तर बढ़ने का क्रम जारी है।
सावन की औपचारिक शुरुआत से पहले ही काशी पूरी तरह शिवभक्ति के रंग में रंग चुकी है। कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर विशेष नजर बनाए हुए है।
