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एक बार भूपति मन मांही…

रवीन्द्र मिश्रा / मुंबई

नालासोपारा स्थित इस्कॉन मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा व्यास श्री रघुनाथदास प्रभु जी ने भगवान श्रीराम के अवतरण और उनके पूर्वजों का विस्तार से वर्णन किया।
उन्होंने रामचरितमानस की चौपाई “एक बार भूपति मन मांही, भई ग्लानि मोरे सुत नांही” का उल्लेख करते हुए बताया कि अयोध्या के राजा दशरथ के मन में संतान न होने की चिंता कैसे उत्पन्न हुई।
कथावाचक ने बताया कि भगवान श्रीराम ब्रह्मा की 39वीं पीढ़ी में अवतरित हुए थे। उन्होंने भगवान श्रीराम के पूर्वजों का वर्णन करते हुए कहा कि ब्रह्मा, मरीचि, कश्यप, विवस्वान, मनु, इक्ष्वाकु, कुक्षि, विकुक्षि, बाण, अनरण्य, पृथु, त्रिशंकु, धुंधुमार, युवनाश्व, मांधाता, सुसंधि, ध्रुवसंधि, प्रसेनजीत, भरत, असित, सगर, असमंज, अंशुमान, दिलीप, भगीरथ, ककुत्स्थ, रघु, प्रवृद्ध, शंखण, सुदर्शन, अग्निवर्ण, शीघ्र, मरु, प्रशुश्रुक, अंबरीष, नहुष, ययाति, नाभाग, अज, दशरथ तथा उनके पुत्र श्रीराम, भरत, लक्ष्मण एवं शत्रुघ्न हुए।
कथावाचक ने कहा कि महाराज दशरथ को संतान प्राप्ति की प्रेरणा उनकी गुरु मां अरुंधती से मिली। एक दिन गुरु मां ने महर्षि वशिष्ठ से कहा कि हम सबका पालन-पोषण तो राजा दशरथ कर रहे हैं, लेकिन उनके बाद हमारे बच्चों का क्या होगा? इस पर महर्षि वशिष्ठ ने उन्हें बच्चों के साथ राजभवन भेजा।
राजभवन में बच्चों के रोने की आवाज सुनकर राजा दशरथ ने उसका कारण पूछा। तब गुरु मां अरुंधती ने कहा कि आपके बाद हमारे बच्चों का क्या होगा। यह सुनकर लगभग 60 हजार वर्ष तक राज्य करने के बाद राजा दशरथ के मन में संतान प्राप्ति की उत्कंठा जागृत हुई। इसके बाद श्रृंगी ऋषि द्वारा संपन्न कराए गए पुत्रेष्टि यज्ञ के फलस्वरूप राजा दशरथ के यहां श्रीराम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न का जन्म हुआ।

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