अरुण कुमार गुप्ता
सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री को गाली देने वाली २५ साल की रुचिका सिंह के खिलाफ पूरी सरकारी मशीनरी लगा दी गई। उसके खिलाफ एफआईआर तक करवा दी गई। इसके बाद सोशल मीडिया पर रुचिका को गालियां दी जा रही हैं। उसके घर का पता सार्वजनिक करवा दिया गया है। कहा जा रहा है कि रुचिका सिंह ने प्रधानमंत्री को गालियां क्यों दीं। सोचिए, रुचिका तो सिर्फ २५ साल की है, जबकि ७५ साल के प्रधानमंत्री गालियों का इस्तेमाल करते ही आए हैं। फिर क्यों नहीं एफआईआर हुई। ट्विटर पर लड़कियों को रेप की धमकी देने वाले को, मां-बहन की गालियां देने वालों को जब पीएम खुद फॉलो करते हैं तो रुचिका सिंह का क्या कसूर इतना बड़ा है। यदि रुचिका पर एफआईआर हुई तो पीएम के खिलाफ भी होनी चाहिए, जिसने कभी शशि थरूर की पत्नी को ५० करोड़ की गर्लप्रâेंड कहा था। सोनिया गांधी को जर्सी गाय कहा था। कर्नाटक की पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के बाद जिन लोगों ने गौरी लंकेश के बारे में घिनौनी बातें कही थीं। गालियां दी थीं। उन लोगों को खुद पीएम फॉलो करते हैं तो इस गाली देने वाले ट्रेंड की शुरुआत किसने की है। पहले कहा था कि बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ। अब वही बेटी प्रधानमंत्री के नाकारापन की वजह से सड़क पर आ गई है। इस बेटी पर एफआईआर करवा कर डराया जा रहा है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान इन्हीं बेटियों के पीछे डंडे घुसवाए गए। सिर फोड़े गए। हाथ-पैर तोड़े गए। पैलेट गन चलवाए गए। लाठियां चलवाई गर्र्इं। अब इसकी एफआईआर कब होगी। आप सोचिए, ऐसे कृत्य से जब लोगों के मन में गुस्सा होगा तो गालियां तो निकल ही जाएंगी। जंतर-मंतर आंदोलन के साथ देश के हर राज्य में प्रदर्शनकारियों को परेशान किया जा रहा है। इससे यही साबित होता है कि बच्चों से सत्ता पूरी तरह घबरा गई है।
मौन क्यों हैं बीजेपी के चाणक्य?
गृह मंत्री अमित शाह को बचाने के चक्कर में भाजपा सेल्फ गोल कर रही है। जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन चलाने के मामले में संसद से सड़क तक अमित शाह घिरे नजर आ रहे हैं। विपक्ष के सवालों से बचने के लिए संसद से गायब हैं। संसद में बहस के दौरान नजर नहीं आ रहे हैं। अब भाजपा के सेल्फ गोल को समझिए। भाजपा कह रही है कि प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन से फायरिंग की गई। उसका आदेश अमित शाह ने नहीं, बल्कि मजिस्ट्रेट ने दिया था। तो यहां सवाल यह है कि जब देश में किसी चोर, पॉकेटमार को पकड़ा जाता है तो उसकी क्रेडिट गृह मंत्री अमित शाह लेते हैं। जब छात्रों का इतना बड़ा आंदोलन हुआ और उन पर पैलेट गन तक चलवाई गई तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है। वहीं गोदी मीडिया चिल्ला-चिल्लाकर कह रही थी कि इस आंदोलन का कनेक्शन पाकिस्तान और चीन से है, तो फिर ऐसे में अमित शाह कहां थे। क्या प्रदर्शन के दौरान अमित शाह का संपर्क पुलिस से नहीं था। यही नहीं, अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए भाजपा नेता गाली-गलौज पर उतर आए हैं। हम आपको इतिहास में लेकर चलते हैं। जो पुलिस वाला छात्रा के पीछे डंडा घुसाता नजर आया आज वह ऑन ड्यूटी है और छात्रों को बदनाम करने के लिए गोदी मीडिया ने पाकिस्तान और चीन कनेक्शन को जोड़ दिया। यही नहीं अब दिल्ली पुलिस विक्टिम कार्ड खेलते हुए नजर आ रही है और अपने परिजनों को आगे कर अलग ही रोना रो रही है, लेकिन बीजेपी के चाणक्य मौन हैं।
