-चार महीने की देरी से रिजल्ट, ८३ ज्ञ् छात्र हुए फेल
-आईडीओएल की लापरवाही से हजारों भविष्य अधर में
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई विश्वविद्यालय के दूरस्थ एवं मुक्त शिक्षण संस्थान (आईडीओएल) की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। प्रथम वर्ष बी.कॉम. और कला पाठ्यक्रम के प्रथम सेमेस्टर के नतीजों ने विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। चार महीने की लंबी देरी के बाद जारी हुए परिणाम में महज १७ प्रतिशत विद्यार्थी ही सफल हो सके, जबकि हजारों छात्रों को असफल घोषित कर दिया गया।
बी.कॉम. प्रथम सेमेस्टर में कुल २,५४३ विद्यार्थियों में से २,०८६ छात्र फेल हुए, जबकि केवल ४५७ विद्यार्थी ही पास हो पाए। वहीं कला संकाय में २,२२४ विद्यार्थियों में से सिर्फ ४६० छात्र उत्तीर्ण हुए और १,७६४ छात्रों को असफलता का सामना करना पड़ा। इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के असफल होने से मूल्यांकन प्रक्रिया और आईडीओएल की शैक्षणिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विद्यार्थियों की शिकायतों को लेकर युवासेना के प्रतिनिधिमंडल ने मुंबई विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. प्रसाद कारंडे से मुलाकात कर समस्याएं रखीं। युवासेना ने आरोप लगाया कि रिजल्ट में देरी, अध्ययन सामग्री की अनुपलब्धता, अंतिम समय पर सूचनाएं जारी करना और मूल्यांकन में कथित गड़बड़ियों के कारण विद्यार्थियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। छात्रों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती एटीकेटी परीक्षा, उसके परिणाम और अगले शैक्षणिक वर्ष में प्रवेश को लेकर बनी हुई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने समीक्षा बैठक बुलाने का आश्वासन जरूर दिया है, लेकिन विद्यार्थियों का सवाल है कि हर बार आश्वासन ही क्यों मिलता है, समाधान क्यों नहीं? चार महीने की देरी और ८३ प्रतिशत छात्रों की असफलता ने मुंबई विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
