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विकास का शिलान्यास या नोट उड़ाऊ तमाशा!

-मथुरा में भाजपा विधायक के कार्यक्रम के मंच पर हरियाणवी डांसर्स के ठुमके, समर्थकों ने उड़ार्इं नोटों की गड्डियां

सामना संवाददाता / मथुरा

गोवर्धन विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों के शिलान्यास का मंच सोमवार को विकास से अधिक हरियाणवी डांसर्स के ठुमकों और उड़ते नोटों के कारण चर्चा में रहा। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में मंच पर दो कलाकार नृत्य करती दिखाई दे रही हैं, जबकि नीचे बैठे और खड़े लोग उन पर नोटों की गड्डियां लुटा रहे हैं।
यह आयोजन १ अगस्त को गांव जानू में हुआ था, जहां करीब ढाई करोड़ रुपए की लागत से प्रस्तावित विभिन्न विकास कार्यों का शिलान्यास किया गया। भाजपा विधायक मेघश्याम सिंह ने भी अपने सोशल मीडिया पेज पर ग्राम जानू में कार्यक्रम आयोजित होने की सूचना साझा की थी। विवाद बढ़ने के बाद भाजपा महानगर अध्यक्ष हरीशंकर यादव ने इससे पार्टी और विधायक का पल्ला झाड़ते हुए दावा किया कि यह स्थानीय लोगों का आयोजन हो सकता है।
मंच के सामने रखी गई थीं शिलान्यास पट्टिकाएं
वायरल वीडियो में सबसे चौंकानेवाला दृश्य यह है कि मंच के ठीक सामने विकास कार्यों से संबंधित शिलान्यास पट्टिकाएं रखी हुई हैं और उसी मंच पर डांस का कार्यक्रम चल रहा है। दर्शकों में मौजूद कुछ लोग नोटों की पूरी गड्डियां निकालकर कलाकारों की ओर उछालते नजर आ रहे हैं।
सवालों के घेरे में शिलान्यास कार्यक्रम
गोवर्धन विधानसभा क्षेत्र में जिस कार्यक्रम में विधायक के हाथों सरकारी विकास कार्यों का शिलान्यास हुआ, उसके मंच और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी आखिर किसकी थी? विधायक मेघश्याम सिंह का पक्ष सामने नहीं आया है, लेकिन वायरल तस्वीरों ने विकास कार्यक्रमों की गरिमा, सार्वजनिक मंचों के इस्तेमाल और खुलेआम उड़ाई गई नकदी के स्रोत पर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
शिलान्यास सरकारी विकास कार्यों का था तो डांस कार्यक्रम किसकी अनुमति से हुआ?
नोट उड़ानेवाले लोग कौन थे और गड्डियों में लुटाई गई रकम कहां से आई? कार्यक्रम निजी था तो मंच पर विधायक और शिलान्यास पट्टिकाएं क्यों मौजूद थीं?
भाजपा के पूर्व सांसद ने छोड़ी सक्रिय राजनीति, सरकारी स्कूल में फिर संभाली शिक्षक की जिम्मेदारी
अगरतला के पूर्व भाजपा सांसद रेबती त्रिपुरा ने सक्रिय राजनीति से दूरी बनाकर फिर से सरकारी शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं शुरू कर दी हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल पार्टी में उनके पास कोई सक्रिय जिम्मेदारी नहीं थी इसलिए अपने पुराने पेशे में लौटने का पैâसला किया। उनका कहना है कि शिक्षक की नौकरी उन्हें समाज की सेवा का अवसर देने के साथ-साथ भविष्य में पेंशन की सुरक्षा भी प्रदान करेगी। उन्होंने २० जुलाई से अगरतला के एक सरकारी स्कूल में दोबारा पढ़ाना शुरू कर दिया है।

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