कर्नाटक की राजधानी में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अपनी कैबिनेट में बंगलुरु के विधानसभा क्षेत्रों से छह विधायकों को मंत्री पद दिए, जिनमें जमीर अहमद खान और रिजवान अरशद शामिल हैं। यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि बंगलुरु शहर में २८ विधानसभा क्षेत्र हैं और ग्रेटर बंगलुरु अथॉरिटी (जीबीए) का हिस्सा रहे इसके पांच नगर निगमों के चुनाव दिसंबर में होने की संभावना है। इस बीच, सरकार के रामनगर जिले का नाम बदलकर बंगलुरु दक्षिण करने के फैसले ने इस क्षेत्र में राजनीतिक मौजूदगी को और मजबूत किया है, क्योंकि सीएम शिवकुमार और नए मंत्री एचसी बालकृष्ण की पहचान बंगलुरु दक्षिण क्षेत्र से जुड़ी है। शिवकुमार सिद्धारमैया सरकार में बंगलुरु विकास मंत्री थे। मंत्री न बन पाने वाले विजयनगर के विधायक एम. कृष्णप्पा के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया। पूर्व मंत्री दिनेश गुंडू राव, जो पश्चिम-मध्य बंगलुरु क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, उन्हें भी कैबिनेट से हटा दिया गया।
नेहरू पिछड़े
फ्रेंड्स, अंग्रेजों से लाखों लोग लड़ रहे थे। एक आकलन कहता है कि १८५७ से १९४७ तक अंग्रेजों से लड़ते हुए १० लाख से अधिक लोग मारे गए। ६० हजार से ज्यादा अधिकृत स्वतंत्रता सेनानी रहे देश में। लाखों ऐसे रहे, जो अंग्रेजों से लड़े, जीवित भी रहे, लेकिन उनका संघर्ष दस्तावेजों में दर्ज नहीं हुआ। मतलब नेहरू अकेले नहीं थे। बहुत बड़ी संख्या में एक नाम उनका भी था। लेकिन १५ या २५ साल की किसी बच्ची से माफी मंगवाने का इतिहास खंगालें तो पूरी दुनिया में अकेला नाम हमारे ओजस्वी, त्रिकालदर्शी, नॉन बायोलॉजिकल माननीय अवतारीलाल का आता है। नेहरू यहां भी पिछड़ गये।
ट्रेंड सेटर
कड़क सफेद खादी का कुर्ता, बनियान और गांधी टोपी कभी नेताओं की पहचान हुआ करती थी। लेकिन अब यह पहनावा धीरे-धीरे एक नए, आधुनिक स्टाइल में बदल रहा है। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल अक्सर क्रीम रंग की कॉटन या लिनन शर्ट और खाकी पेंट पहने नजर आते हैं। वे इस नए ट्रेंड को शुरू करने वाले बने हैं। पारंपरिक कुर्ता या कोटी के बजाय शर्ट को बाहर (अनटक) रखकर पहनने के उनके अंदाज को कई लोग अपना रहे हैं। इस स्टाइल को अपनाने वालों में स्पीकर शंकर चौधरी और मंत्री कौशिक वेकारिया, प्रफुल्ल पानशेरिया और हर्ष संघवी शामिल हैं। यहां तक कि विपक्ष के नेता अमित चावड़ा और गोपाल इटालिया ने भी इस लुक को अपनाया है। यह नया राजनीतिक शैली का लिबास है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं तथा व्यंग्यात्मक लेखन में महारत रखते हैं।)
