अरुण कुमार गुप्ता
देशभर में इथेनॉल को लेकर बवाल मचा हुआ है। वाहन मालिक इथेनॉल के कारण खराब होते वाहनों के पार्ट्स का हवाला देते हुए मोदी सरकार की आलोचना कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर खबर है कि इथेनॉल पॉलिसी को लेकर नीति आयोग की एक रिपोर्ट जारी हुई थी, लेकिन बाद में उसे हटा दिया गया। एआरएआई यानी ऑटोमोबाइल रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया की इथेनॉल पॉलिसी पर टेस्टिंग रिपोर्ट भी आई थी, लेकिन उसे भी जनता के सामने आने ही नहीं दिया गया। अभी तक उसे गोपनीय रखा गया है। इथेनॉल से गाड़ियों के फ्यूल पंप खराब होते हैं। इस पर एसआईएएम यानी सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर की एक रिपोर्ट वेबसाइट पर डाली गई थी, लेकिन बाद में डिलीट कर दी गई। इससे यह साबित होता है कि इथेनॉल पॉलिसी में जरूर कोई गड़बड़ी है। हद तो तब हो गई जब मोदी सरकार सभी रिपोर्ट को ब्लॉक करवाने के बाद कह रही है कि इथेनॉल की वजह से गाड़ियों के पार्ट खराब नहीं होते हैं। ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है। सिर्फ गाड़ियों की माइलेज ६ से ९ प्रतिशत कम हुई है। आपको हम बता दें कि देश में ३० करोड़ ऐसे वाहन हैं, जो इथेनॉल पर चलने के लायक नहीं हैं। इसमें ८ करोड़ कारें और २२ करोड़ मोटरसाइकिल हैं। इसके बावजूद मोदी सरकार तानाशाही पर उतरी हुई है। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल कल लोगों की शिकायत की ढाई लाख चिट्ठियां लेकर प्रधानमंत्री मोदी से मिलना चाहते थे, उन्हें भारी फोर्स लगाकर रोक दिया गया। अब सवाल यह है कि मोदी सरकार अमेरिका से इथेनॉल खरीद रही है वह भी पेट्रोल से ज्यादा कीमत पर और जबरदस्ती बेच रही है। मोदी जी ट्रंप से क्यों डर रहे हैं। ट्रंप के पास क्या कोई सीक्रेट है, जिससे डरे हुए हैं। एक बार डर बाहर निकालकर ट्रंप के सामने तनकर खड़े हो जाइए। पूरा देश मोदी जी आपके साथ खड़ा हो जाएगा।
देश में अघोषित इमरजेंसी!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इमरजेंसी के दौरान कभी जेल नहीं गए। जब भी मोदी जी बात करते हैं तो इमरजेंसी का रोना रोते रहते हैं, लेकिन अपनी अघोषित इमरजेंसी के बारे में कभी बात नहीं करते हैं, जिसमें वह बेकसूर लोगों को, ईमानदार नेताओं को जेल भेजकर उनकी जिंदगी बर्बाद करने की कोशिश की है। इसी तरह का पर्दाफाश कल दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने किया। कोर्ट के मजिस्ट्रेट पारस दलाल ने दिल्ली पुलिस को फटकार लगाते हुए पूर्व विधायक नरेश बालियान को बरी कर दिया। मामला था फिरौती का। मामला यह था कि ३१ में २०२३ को एक व्यक्ति ने दिल्ली पुलिस में शिकायत की थी कि उसे एक यूके के गैंगस्टर सांगवान उर्फ नंदू का फोन आया, जिसमें उसने एक करोड़ की फिरौती मांगी है और न देने पर जान मारने से धमकी दी है। इसके बाद दिल्ली पुलिस खामोश बैठ गई। अब दिल्ली पुलिस की क्रोनोलॉजी समझिए, शिकायत हुई थी मई २०२३ में और एफआईआर दर्ज हुई ३ महीने बाद यानी अगस्त २०२३ में, वह भी जब एक ऑडियो क्लिप फेसबुक पर वायरल हुई। एक बात और जिस व्यक्ति ने शिकायत की थी, उसका मोबाइल फोन तक पुलिस ने सीज नहीं किया था। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। क्योंकि उस वक्त दिल्ली में कोई चुनाव नहीं था, लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव से २ महीने पहले यानी शिकायत के १ साल बाद नवंबर २०२४ में मामले को पुलिस ने फिर जीवित किया और जनवरी २०२५ में नरेश बालियान को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। अब राऊज एवेन्यू कोर्ट ने बालियान को बरी करते हुए कहा कि बालियान के खिलाफ कोई सबूत ही नहीं है। दिल्ली पुलिस कोई सबूत पेश नहीं कर पाई है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को लताड़ लगाते हुए कहा कि सिर्फ कोर्ट का समय बर्बाद किया गया है। अब आप सोचिए भाजपा वैâसे सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल कर लोगों की जिंदगी बर्बाद करती है।
