-७ सालों में काटे गए डेढ़ लाख से ज्यादा पेड़
-सिमट रहा हरित क्षेत्र, प्रदूषण का नया गढ़ बनने की आशंका
-पर्यावरणविद राजेश रुपारेल ने चेतावनी दी कि ५० वर्ष पुराने वृक्षों की भरपाई नए पौधे कभी नहीं कर सकते। यदि इसी तरह अंधाधुंध वृक्षों की कटाई जारी रही तो ठाणे का हरित क्षेत्र तेजी से समाप्त हो जाएगा और यह इलाका आनेवाले वर्षों में ‘सीमेंट का रेगिस्तान’ बन सकता है।
रामदिनेश यादव / मुंबई
मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में विकास परियोजनाओं की रफ्तार के बीच पर्यावरण पर पड़ रहे गंभीर प्रभाव का खुलासा हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ठाणे और शाहपुर वन क्षेत्र में एक्सप्रेस-वे, रेलवे, गैस पाइपलाइन और सिंचाई परियोजनाओं के लिए पिछले कुछ वर्षों में डेढ़ लाख से ज्यादा पेड़ों की कटाई की गई है। इससे ठाणे का हरित क्षेत्र लगातार सिकुड़ता जा रहा है और भविष्य में प्रदूषण बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
जानकारों का मानना है कि महायुति सरकार और एकनाथ शिंदे की गलत नीतियों का खामियाजा ठाणेकर भुगतेंगे। ठाणे में आनेवाले दिनों में भारी प्रदूषण की संभावना है देखते ही देखते यह शहर कंक्रीट का रेगिस्तान बन जाएगा।
पर्यावरण कार्यकर्ता जीतेंद्र घाडगे ने कहा कि आरटीआई से सामने आए आंकड़े वास्तविक स्थिति का केवल एक छोटा हिस्सा हैं। सरकार इन परियोजनाओं को विकास का प्रतीक बता रही है, लेकिन इसके लिए प्राकृतिक कार्बन अवशोषकों का लगातार विनाश किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन पेड़ों के बदले पौधारोपण किया जाता है, उनमें से कितने वास्तव में जीवित रहते हैं, इसकी पारदर्शी निगरानी नहीं होती। उनका कहना है कि अल्पकालिक विकास के लिए दीर्घकालिक पर्यावरणीय सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है।
रेलवे परियोजनाओं के तहत कल्याण-कसारा तीसरी रेल लाइन के लिए शाहपुर क्षेत्र में १६.६८४६ हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग किया गया। इस परियोजना में ९२१ पेड़ों की कटाई प्रस्तावित थी, जिनमें से ८५१ पेड़ पहले ही काटे जा चुके हैं। इसके अलावा कल्याण-बदलापुर चौथी रेल लाइन के लिए भी मोरीवली क्षेत्र में वृक्षों की कटाई की गई है। सबसे अधिक प्रभाव मुंबई-नागपुर समृद्धि महामार्ग परियोजना में देखने को मिला।
