-`१६ हजार करोड़ की परियोजना पर भड़का विरोध; नासिक में चक्का जाम, कई नेता हिरासत में
-परियोजना में बदलाव से नाराज लोगों का सड़क पर विस्फोट
स्थानीय नागरिकों और आंदोलनकारियों का कहना है कि मूल मार्ग में बदलाव से परियोजना का लाभ सीधे तौर पर उन क्षेत्रों को नहीं मिल पाएगा, जहां इसके जरिए विकास की उम्मीद जगी थी। यही वजह है कि परियोजना के मार्ग में बदलाव अब महज तकनीकी मुद्दा न रहकर स्थानीय अस्मिता, विकास और रोजगार से जुड़ा सवाल बन गया है।
सामना संवाददाता / मुंबई
केंद्र की मोदी सरकार के रेल विभाग के एक फैसले से नासिक में जनाक्रोश भड़क उठा है। हजारों की तादाद में लोग सड़कों पर उतर आए। ९ अगस्त, क्रांति दिवस के मौके पर चाकण से सिन्नर तक कई स्थानों पर चक्काजाम आंदोलन किया गया। दरअसल, पुणे-नासिक सेमी हाईस्पीड रेल परियोजना के मूल मार्ग को बदलने के सरकार के फैसले के खिलाफ नासिक में यह जनआक्रोश सड़क पर उतरा। आंदोलनकारियों ने सरकार से मांग की कि करीब १६ हजार करोड़ रुपए की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का मूल मार्ग तत्काल बहाल किया जाए। सिन्नर तालुका के गोंदे फाटा स्थित समृद्धि महामार्ग के पास विधायक सत्यजीत तांबे के नेतृत्व में आंदोलन किया गया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जोरदार झड़प हुई। आंदोलन को रोकने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया और सत्यजीत तांबे को हिरासत में ले लिया। इसके बाद आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने समृद्धि महामार्ग पर चक्काजाम करने का प्रयास किया।
सरकार ने बदला १६ हजार करोड़ की परियोजना का मार्ग!
पुणे-नासिक सेमी हाईस्पीड रेल परियोजना का मूल मार्ग पुणे-चाकण-राजगुरुनगर-मंचर-नारायणगांव-आलेफाटा-संगमनेर-सिन्नर-नासिक निर्धारित किया गया था। लेकिन जुन्नर के नारायणगांव में स्थित विश्वस्तरीय जीएमआरटी रेडियो टेलीस्कोप को संभावित खतरे का हवाला देते हुए रेल मंत्रालय ने मूल मार्ग बदलने का फैसला किया। इसके बाद नासिक-शिर्डी–पुणतांबा और अहिल्यानगर-चाकण जैसे वैकल्पिक मार्गों का सर्वेक्षण शुरू किया गया।
