लंबित मांगों को लेकर कंडक्टर -तकनीशियनों का कामबंद आंदोलन
सामना संवाददाता / मुंबई
वसई-विरार महानगरपालिका के भ्रष्ट और निकम्मे प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा आज एक बार फिर आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। कर्मचारियों की जायज मांगों को लगातार नजरअंदाज करने वाले बेपरवाह प्रशासन के मुंह पर तमाचा जड़ते हुए परिवहन विभाग के कंडक्टरों और तकनीशियनों ने मंगलवार सुबह ६ बजे से अचानक कामबंद आंदोलन शुरू कर दिया। सुबह से ही सातीवली और विरार डिपो में बसें खड़ी हैं और सड़कों से वीवीएमसी की बसें पूरी तरह गायब हैं। प्रशासन की इस नाकामी के कारण वसई-विरार के हजारों दैनिक यात्रियों का बुरा हाल हो चुका है। महीनों से अपनी जायज मांगों को लेकर आवाज उठा रहे कर्मचारियों के सब्र का बांध आखिरकार टूट ही गया। जब-जब कर्मचारियों ने अपने अधिकार मांगे, तब-तब अधिकारियों ने सिर्फ खोखले आश्वासन दिए।
प्रशासन की नींद ने ६५,००० यात्रियों को किया बेहाल
एक रिपोर्ट के अनुसार महानगरपालिका के पास कुल ११४ सामान्य बसें और ४० ई-बसें हैं, जो ३६ अलग-अलग मार्गों पर दौड़ती हैं। प्रतिदिन ६० से ६५ हजार आम नागरिक, मजदूर और विद्यार्थी इन बसों से सफर करते हैं। मंगलवार सुबह जब लोग अपने काम पर जाने के लिए निकले, तो डिपो खाली पड़े थे। निजी ऑटो चालकों और अन्य साधनों की लूट का शिकार आम जनता को होना पड़ा। बार-बार चेतावनी देने के बाद भी जब बहरे प्रशासन के कान पर जूं नहीं रेंगी, तब कर्मचारियों को यह कदम उठाना पड़ा। एक कर्मचारी ने कहा कि अगर कर्मचारियों की न्यायसंगत मांगों को पूरा नहीं किया, तो यह जन-आक्रोश और विकराल रूप धारण करेगा।
कर्मचारियों की मुख्य मांगे
समान काम का समान वेतन दिया जाए। कानून के अनुसार, ओवरटाइम का भुगतान, काम के तय घंटे और बीच में उचित विश्राम की व्यवस्था हो। कॉन्ट्रैक्ट प्रणाली को तुरंत समाप्त किया जाए। कर्मचारियों पर मनमाने ढंग से लगाए जा रहे वित्तीय जुर्माने और दंडात्मक कार्रवाई पर तुरंत रोक लगे। बोनस, ग्रेच्युटी और जमा राशि का तुरंत भुगतान हो।
