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आपकी ऑनलाइन जिंदगी में भी ताका-झांकी!

-आईपीडीआर से इंटरनेट गतिविधियों की कुंडली खंगालने की तैयारी
-दिल्ली पुलिस की नई एसओपी पर उठे गंभीर सवाल

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
अब इंटरनेट पर आपकी हर गतिविधि पुलिस की नजरों से बच नहीं पाएगी? दिल्ली पुलिस ने आईपीडीआर और डंप डेटा के विश्लेषण के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। इसके तहत जांच एजेंसियां इंटरनेट यूजर की गतिविधियों से जुड़े मेटाडेटा का विश्लेषण कर सकेंगी। पुलिस का दावा है कि इसका इस्तेमाल गंभीर अपराधों, संदिग्ध गतिविधियों और बड़े आयोजनों के दौरान जांच को मजबूत करने के लिए किया जाएगा। हालांकि, इस व्यवस्था ने निजता और निगरानी की सीमाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, आईपीडीआर से सोर्स और डेस्टिनेशन आईपी एड्रेस, पोर्ट, अपलोड-डाउनलोड डेटा, सेशन की अवधि और सब्सक्राइबर से जुड़े विवरण जैसी जानकारी हासिल की जा सकती है। टाइमस्टैंप के जरिए यह भी पता लगाया जा सकता है कि किसी समय कौन-सी इंटरनेट सेवा या एप्लिकेशन इस्तेमाल हुई। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, लाल किले जैसी संवेदनशील जगहों पर विस्फोट, जघन्य अपराध या बड़े जुलूसों के दौरान डंप डेटा का विश्लेषण किया जा सकता है। एसओपी में वीपीएन और प्रॉक्सी की पहचान तथा असामान्य आईपी एड्रेस, पोर्ट, लंबे सेशन और असामान्य समय पर ज्यादा डेटा इस्तेमाल जैसे पैटर्न की पहचान के निर्देश भी हैं।
सोशल मीडिया पर पब्लिक बोली, ‘डिजिटल जासूसी’ की तैयारी!
दिल्ली पुलिस की आईपीडीआर और डंप डेटा के विश्लेषण संबंधी एसओपी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर निजता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि ऑनलाइन गतिविधियों पर इतनी गहरी नजर रखना कहीं ‘डिजिटल जासूसी’ का रास्ता तो नहीं खोल रहा।

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