धीरज फूलमती सिंह / मुंबई
क्रिकेट की दुनिया के इकलौते थाला यानी महेंद्र सिंह धोनी का इंग्लैंड सीरीज के दौरान स्टैंड्स में नजर आना, सच कहूं तो मुझे यह कोई मामूली बात नहीं लगती! हम सब जानते हैं कि माही वो इंसान कतई नहीं हैं, जो हर दूसरे मैच में वैâमरे के सामने हाथ हिलाते दिख जाएं। उनका अपने होमग्राउंड रांची में दिख जाना या मुंबई के किसी हाई-वोल्टेज मैच में नजर आना तो फिर भी समझ आता है, लेकिन समंदर पार इंग्लैंड जाकर पूरी सीरीज के तीनों मैच दर्शक दीर्घा से देखना? बॉस, कुछ तो बात जरूर है।
अब जहां तक बात टीम इंडिया के हेड कोच बनने की है, तो ईमानदारी से कहूं, तो मुझे इसकी गुंजाइश न के बराबर लगती है। एक फुल-टाइम कोच बनने का मतलब है कि हमेशा अपना सूटकेस पैक रखो, १२ महीने टीम के साथ दुनिया नापो और लगातार यात्राओं की थकान झेलो। धोनी पिछले कुछ सालों से रांची में अपने फार्महाउस, विंटेज कारों और बाइक्स के साथ जिस सुकून भरी जिंदगी का लुत्फ उठा रहे हैं, उसे देखते हुए वह इस भारी-भरकम झमेले में पड़ेंगे, ऐसा कतई नहीं लगता।
हां, मेंटर के रूप में उनकी वापसी वाली थ्योरी में जरूर तगड़ा दम नजर आता है। आज भी क्रिकेट की पिच को पढ़ने की उनकी वो कंप्यूटर जैसी पारखी नजर और खौफनाक दबाव के बीच बर्फ की तरह ठंडे रहकर पैâसले लेने की वो जादुई कला दुनिया में किसी और खिलाड़ी के पास नहीं है। लेकिन रुकिए… क्या हेड कोच गौतम गंभीर और महेंद्र सिंह धोनी एक ही ड्रेसिंग रूम की हवा साझा कर पाएंगे? एक तरफ गंभीर का वो धधकता हुआ आक्रामक रवैया और दूसरी तरफ माही का वो शांत और ठहरा हुआ अवतार! दोनों ही भारतीय क्रिकेट के कोहिनूर हैं, लेकिन दोनों की सोच और काम करने की शैली दो अलग-अलग ध्रुवों की तरह है।
खैर, फिलहाल तो यह सब कयासों के बाजार की बातें हैं। लेकिन एक बात तो शीशे की तरह साफ है कि इंग्लैंड के लगातार तीनों मैचों में माही भाई का स्टैंड्स में बैठना सिर्फ एक इत्तेफाक नहीं हो सकता। यकीन मानिए, जरूर कोई बड़ी स्क्रिप्ट लिखी जा रही है, जिसका ट्रेलर हमें जल्द ही देखने को मिल सकता है!
