-फ्लैश मैरिज ‘शनहुन’
-‘बस दस दिन ही तो हुए थे हमें मिलते हुए और आज हम कोर्ट में एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हैं।’
एमएमएस
३० वर्षीय चेन वेई जब शंघाई के पैâमिली कोर्ट से बाहर निकलीं, तो उनके चेहरे पर सिर्फ पछतावा था। चीन में यह अकेले चेन वेई की कहानी नहीं है, बल्कि आज पूरा देश ‘फ्लैश मैरिज’ (शनहुन) से उपजी गंभीर सामाजिक समस्याओं से जूझ रहा है। चीन में युवाओं द्वारा बिना सोचे-समझे, महज कुछ दिनों या हफ्तों की पहचान के बाद शादी करने का यह चलन अब एक बड़ी मुसीबत बन चुका है।
चीन में युवाओं पर सही उम्र में शादी करने का अत्यधिक पारिवारिक और सामाजिक दबाव होता है। नए साल या छुट्टियों के दौरान जब युवा अपने घर लौटते हैं, तो माता-पिता उन्हें लगातार ‘ब्लाइंड डेट्स’ पर भेजते हैं। इस पारिवारिक दबाव, अकेलेपन और ऑनलाइन मैचमेकिंग ऐप्स के प्रभाव में आकर कई युवा जल्दबाजी में विवाह जैसा बड़ा फैसला ले लेते हैं।
शंघाई की एक सच्ची कहानी
शंघाई के एक आईटी पेशेवर झांग मिन और बीजिंग की शिक्षिका लियू की मुलाकात एक डेटिंग ऐप के जरिए हुई। पहली ही मुलाकात में दोनों के बीच गहरा आकर्षण हुआ। चीनी न्यू ईयर के पारिवारिक तनाव से बचने और प्यार के जुनून में दोनों ने मुलाकात के ठीक १२वें दिन शादी का रजिस्ट्रेशन करवा लिया।
शादी के पहले हफ्ते तक सब ठीक रहा, लेकिन जैसे ही उन्होंने एक साथ रहना शुरू किया, असलियत सामने आने लगी। वित्तीय फैसलों से लेकर छोटी-मोटी घरेलू आदतों तक, हर बात पर विवाद होने लगा। झांग मिन को एहसास हुआ कि वे लियू के स्वभाव के कड़वे पहलुओं से पूरी तरह अनजान थे।
लियू को लगा कि झांग अपने काम में इतने व्यस्त रहते हैं कि उनके पास रिश्ते के लिए समय ही नहीं है। जिस रिश्ते की शुरुआत १२ दिनों में हुई थी, उसका अंत शादी के महज ३५वें दिन तलाक की अर्जी के साथ हुआ।
परिणाम और सरकारी कदम
चीन में फ्लैश मैरिज के बाद होने वाले इन त्वरित तलाकों ने सरकार और समाजशास्त्रियों की चिंता बढ़ा दी है। जल्दबाजी में बने ये रिश्ते न केवल जोड़ों को वित्तीय और मानसिक रूप से तोड़ रहे हैं, बल्कि देश की जनसांख्यिकी और सामाजिक स्थिरता पर भी बुरा असर डाल रहे हैं।
इस स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चीन सरकार को २०२१ में ‘३०-डे कूलिंग-ऑफ पीरियड’ का नियम लागू करना पड़ा। इसके तहत तलाक की अर्जी देने के बाद भी जोड़ों को ३० दिनों का समय दिया जाता है, ताकि वे अपने फैसले पर दोबारा विचार कर सकें।
चीन का यह उदाहरण दिखाता है कि भले ही ‘फ्लैश मैरिज’ शुरुआत में एक रोमांचक और आसान रास्ता लगे, लेकिन बिना एक-दूसरे को समझे लिया गया यह फैसला जीवन भर का दर्द बन जाता है।
