मुख्यपृष्ठस्तंभइस बार कई मुस्लिम भी बने शिवभक्तों की यात्रा का हिस्सा!

इस बार कई मुस्लिम भी बने शिवभक्तों की यात्रा का हिस्सा!

-कांवड़ में गंगा-जमुनी रंग: सलमान से उज्मा तक
-किसी ने २१ लीटर तो किसी ने २५१ लीटर गंगाजल उठाया, बुर्के में महिलाओं ने भी की पदयात्रा
सलमान, शाकिर, अनीसा बानो, तमन्ना मलिक, उज्मा खान और सलीम वास्तिक के मामले आए सामने
सिर पर जालीदार टोपी और कंधे पर कांवड़ लेकर सलमान अपने हिंदू मित्रों के साथ हरिद्वार से संभल की ओर निकले। एक रिपोर्ट की मानें तो उनके पास २१ लीटर गंगाजल होने की बात कही गई है।

संभल / मेरठ /गाजियाबाद
सावन की कांवड़ यात्रा को आमतौर पर भगवान शिव के हिंदू श्रद्धालुओं की धार्मिक यात्रा के रूप में देखा जाता है, लेकिन २०२६ की कांवड़ यात्रा ने कई जगह गंगा-जमुनी तहजीब की अलग तस्वीर भी दिखाई। इस बार सार्वजनिक रूप से सामने आई खबरों में कई मुस्लिम पुरुष और महिलाओं ने कांवड़ उठाई, गंगाजल लेकर पैदल चले और किसी ने आस्था तो किसी ने सामाजिक भाईचारे को अपनी यात्रा का मकसद बताया।
इनमें सबसे ताजा नाम संभल के सलमान का है। सिर पर जालीदार टोपी और कंधे पर कांवड़ लेकर सलमान अपने हिंदू मित्रों के साथ हरिद्वार से संभल की ओर निकले। एक रिपोर्ट की मानें तो उनके पास २१ लीटर गंगाजल होने की बात कही गई है। सलमान ने कहा कि वह अपनी इच्छा से यह यात्रा कर रहे हैं और उनका मकसद समाज में प्रेम, मोहब्बत और हिंदू-मुस्लिम भाईचारे का संदेश देना है।
शाकिर ने उठाई भारी-भरकम कांवड़
मेरठ के फलावदा निवासी मोहम्मद शाकिर भी इस वर्ष खूब चर्चा में रहे। वह अपने हिंदू मित्र मिंटू के साथ हरिद्वार से कांवड़ लेकर निकले। एक रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों ने २५१ लीटर गंगाजल की कांवड़ उठाई। शाकिर ने कहा कि धर्म दोस्ती के बीच नहीं आना चाहिए और उनकी यात्रा सामाजिक सौहार्द मजबूत करने के लिए है। हालांकि, कुछ अन्य खबरों में शाकिर की कांवड़ में २०१ लीटर गंगाजल होने का उल्लेख है।
बुर्के में कांवड़ लेकर निकलीं अनीसा बानो और तमन्ना मलिक
कांवड़ यात्रा में महिलाओं की दो तस्वीरों ने भी जबरदस्त ध्यान खींचा। नई दिल्ली की अनीसा बानो और संभल की तमन्ना मलिक हरिद्वार से कांवड़ लेकर मेरठ-गाजियाबाद मार्ग पर पहुंचीं। दोनों का कई जगह स्वागत हुआ। अनीसा ने अपने बच्चों की सुपुर्दगी से जुड़ी मन्नत को यात्रा का कारण बताया, जबकि तमन्ना ने कहा कि उन्होंने निजी मन्नत पूरी होने के बाद कांवड़ उठाई। तमन्ना मलिक इससे पहले फरवरी २०२६ में महाशिवरात्रि के अवसर पर भी हरिद्वार से संभल तक कांवड़ लेकर चर्चा में आई थीं। बाद में अगस्त की यात्रा के बाद डासना स्थित शिव शक्ति धाम में जलाभिषेक किया गया। वहां तमन्ना ने अपना नाम गायत्री त्यागी रखने और सनातन धर्म स्वीकार करने की घोषणा की।
उज्मा खान लगातार दूसरे साल कांवड़ यात्रा पर इस वर्ष एक और चर्चित नाम नोएडा की उज्मा खान का रहा। बुर्वेâ में कांवड़ उठाए उज्मा की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। रिपोर्टों के अनुसार, वह अपने साथी लोकेंद्र मीणा के साथ करीब ९५ से १०० किलोमीटर की कांवड़ यात्रा पर निकलीं और लगभग ४१ लीटर गंगाजल लेकर चलीं। यह लगातार दूसरा वर्ष था जब उज्मा ने कांवड़ यात्रा की। उन्होंने कहा कि आस्था को किसी एक धर्म में बांधकर नहीं देखा जाना चाहिए।
टोपी से बुर्के तक, कांवड़ यात्रा में दिखा साझा आस्था का रंग
कांवड़ यात्रा के दौरान अक्सर दुकानदारों की पहचान, धर्म, खानपान और सांप्रदायिक विवाद खबरों में छाए रहते हैं। मगर २०२६ की इन तस्वीरों ने उसका दूसरा पक्ष भी सामने रखा है, एक मुसलमान टोपी में ‘बम-बम भोले’ के बीच चल रहा है, कोई मुस्लिम महिला बुर्वेâ में कांवड़ उठा रही है और हिंदू साथी उसके साथ कदम मिला रहे हैं।

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