मुख्यपृष्ठस्तंभकोर्ट-रूम: सैनिक की वर्दी का अनधिकृत उपयोग अपराध है

कोर्ट-रूम: सैनिक की वर्दी का अनधिकृत उपयोग अपराध है

एड. कनई बिस्वास
भाग:५६
धारा १६६, १६७ और १६८

-सैनिक, नौसैनिक या वायु सैनिक को आदेश की अवज्ञा के लिए दुष्प्रेरित करना, विशेष अधिनियमों के अधीन आनेवाले व्यक्ति तथा सैनिक, नौसैनिक या वायु सैनिक की वर्दी या पहचान का अनधिकृत उपयोग

भारतीय न्याय संहिता, २०२३ सशस्त्र बलों के अनुशासन, पहचान और गरिमा की रक्षा के लिए विशेष प्रावधान करती है। यदि कोई व्यक्ति सैनिक, नौसैनिक या वायु सैनिक को अपने वरिष्ठ अधिकारी के आदेश की अवज्ञा करने के लिए उकसाता है, तो यह गंभीर अपराध है। इसी प्रकार कुछ व्यक्तियों पर विशेष सैन्य कानून लागू होते हैं, इसलिए उन पर भारतीय न्याय संहिता के कुछ प्रावधान अलग प्रकार से लागू होते हैं। इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति बिना अधिकार सैनिक, नौसैनिक या वायु सैनिक की वर्दी पहनता है या उनकी पहचान से जुड़े प्रतीकों का उपयोग लोगों को धोखा देने के उद्देश्य से करता है, तो वह भी दंडनीय अपराध है। धारा १६६, १६७ और १६८ इन्हीं प्रावधानों को स्पष्ट करती हैं।
केस स्टडी- १: ‘सैनिक को आदेश की अवज्ञा के लिए दुष्प्रेरित करना’ (धारा १६६)
एक व्यक्ति ने सेना के एक जवान को उसके वरिष्ठ अधिकारी के आदेश न मानने और ड्यूटी का पालन करने से इनकार करने के लिए उकसाया। जांच में उसके संदेश और बातचीत के रिकॉर्ड मिले।
अदालत क्या देखेगी?
क्या आरोपी ने सैनिक, नौसैनिक या वायु सैनिक को आदेश की अवज्ञा करने के लिए उकसाया?
क्या संबंधित आदेश वैध था?
क्या आरोपी की भूमिका साक्ष्यों से सिद्ध होती है?
पैâसला- यदि यह साबित हो जाता है कि आरोपी ने सैनिक को आदेश की अवज्ञा करने के लिए दुष्प्रेरित किया, तो उसके विरुद्ध धारा १६६ के तहत कार्रवाई की जाएगी।
केस स्टडी- २: ‘विशेष अधिनियमों के अधीन आने वाले व्यक्ति’ (धारा १६७)
एक सैनिक के विरुद्ध ऐसा मामला दर्ज हुआ, जो सैन्य सेवा के दौरान हुआ था। प्रश्न उठा कि उस पर भारतीय न्याय संहिता लागू होगी या सैन्य कानून।
अदालत क्या देखेगी?
क्या संबंधित व्यक्ति सेना, नौसेना या वायुसेना से संबंधित विशेष कानून के अधीन है?
क्या मामला ऐसे कानून के अधिकार क्षेत्र में आता है?
क्या भारतीय न्याय संहिता का प्रावधान इस मामले में लागू होता है?
पैâसला- अदालत संबंधित विशेष कानून और भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के अनुसार निर्णय करेगी।
समझें: धारा १६७ यह स्पष्ट करती है कि सेना, नौसेना और वायुसेना जैसे विशेष अधिनियमों के अधीन आने वाले व्यक्तियों के मामलों में, जहां संबंधित विशेष कानून लागू होता है, वहां उसी के अनुसार, कार्रवाई की जाएगी।
केस स्टडी- ३: ‘सैनिक की वर्दी या पहचान का अनधिकृत उपयोग’ (धारा १६८)
एक व्यक्ति ने सेना की वर्दी पहनकर लोगों से स्वयं को सैन्य अधिकारी बताया और सरकारी अधिकारी होने का झूठा प्रभाव डालकर लाभ लेने का प्रयास किया।
अदालत क्या देखेगी?
क्या आरोपी ने बिना अधिकार सैनिक, नौसैनिक या वायु सैनिक की वर्दी या पहचान से जुड़ा प्रतीक धारण किया?
क्या उसका उद्देश्य लोगों को धोखा देना या स्वयं को सैनिक बताना था?
क्या उपलब्ध साक्ष्य आरोपी की मंशा सिद्ध करते हैं?
समझें: धारा १६८ के अनुसार, कोई व्यक्ति यदि बिना अधिकार सैनिक, नौसैनिक या वायु सैनिक की वर्दी, बैज, निशान या पहचान से जुड़े किसी प्रतीक का उपयोग इस उद्देश्य से करता है कि लोग उसे वास्तविक सैनिक समझें तो यह दंडनीय अपराध है।
भारतीय न्याय संहिता यह स्पष्ट करती है कि सशस्त्र बलों का अनुशासन, उनकी विशिष्ट पहचान और जनता का उन पर विश्वास राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
(अगले अंक में: धारा १६९, १७० और १७१ – ‘अभ्यर्थी और निर्वाचन अधिकार की परिभाषा, रिश्वत तथा चुनाव में अनुचित प्रभाव’ को आसान उदाहरणों के साथ समझेंगे।)

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