कल स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी लाल किले से एक लंबा, उबाऊ भाषण देंगे। देश कैसे प्रगति के पथ पर है, दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के कल्याण के दरवाजे हमने कैसे खोले… वगैरह-वगैरह बताएंगे। इस बार लाल किले से ‘वंदे मातरम’ गायन का समारोह भी हो रहा है। कुल मिलाकर देश की तस्वीर देखें तो ‘वंदे मातरम’ के बजाय ‘वंदे अडानी’ की नई रचना गाने की नौबत मोदी ने ला दी है। अडानी समूह की दो परियोजनाओं के लिए राज्य सरकार ने ८४ हजार वर्ग फुट वन भूमि देने को मंजूरी दी है। इससे रायगढ़ और अमरावती जिलों के जंगलों का विनाश और पर्यावरण का ह्रास होगा। एक तरफ ‘जंगल बचाओ, मैंग्रोव्ज की रक्षा करो, वन्यजीव बचाओ’ जैसे भाषण देने और दूसरी तरफ खुद अपने ही हाथों जंगलों और मैंग्रोव्ज पर कुल्हाड़ी चलाने का काम हो रहा है। वन विभाग ने रायगढ़ जिले के अलीबाग स्थित ७० हजार वर्ग फुट जमीन अडानी के सीमेंट प्रोजेक्ट के लिए दे दी। यहां अब सीमेंट प्रोजेक्ट आएगा। यानी हवा में प्रदूषण की परत बढ़ेगी। उसका नुकसान प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण अलीबाग और खेती को होगा, लेकिन अडानी को जमीन चाहिए, यह कहते ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कोकण का ‘जंगल’ अडानी को दान कर दिया। यह एक तरह की लूट है। झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा के जंगलों में अडानी की परियोजनाएं खड़ी हो रही हैं। इसके लिए बड़े पैमाने पर जंगल काटे गए, लेकिन देश के पर्यावरण और वन विभाग ने इस अपराध के लिए अडानी समूह को एक साधारण नोटिस तक नहीं भेजा। महाराष्ट्र में कई उद्योगों पर ‘पर्यावरण’ नियम तोड़ने के कारण कार्रवाई हुई। पुणे जिले के ‘लवासा’ जैसे प्रोजेक्ट पर्यावरण के नियम तोड़ने के कारण बंद करवा दिए गए। समुद्र तट के मछुआरों और कोलीवाड़ों को पर्यावरण के नियम दिखाए जाते हैं, लेकिन जैसे ही किसी प्रोजेक्ट में अडानी का नाम आता है, पर्यावरण विभाग की पूंछ दुम दबाकर अंदर चली जाती है। रायगढ़-अमरावती जिलों की वन भूमि गैरकानूनी तरीके से अडानी की जेब में डालना महाराष्ट्र की जनता के साथ गद्दारी है। अडानी की जमीन की भूख मिटती नहीं है और मोदी-फडणवीस की सरकार उनके नखरे उठा रही है। मुंबई की धारावी अडानी की जेब में डाल दी। वहां भी पर्यावरण और लोगों के पुनर्वास के नियम तोड़े जा रहे हैं। अब अडानी की नजर कोकण पर टिक गई है। रायगढ़ में सीमेंट प्रोजेक्ट के लिए जंगल-जमीन दी, यह पहला अपराध; लेकिन इन प्रोजेक्ट्स के कारण उस इलाके के पर्यावरण, मानव स्वास्थ्य और स्थानीय खेती पर गंभीर दुष्परिणाम होंगे, यह दूसरा अपराध। इस प्रोजेक्ट के सीमेंट की सूक्ष्म धूल से दमा, ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों की बीमारियां बढ़ेंगी। सीमेंट प्लांट से निकलने वाली भारी धातुओं (हैवी मेटल्स) से कैंसर और किडनी के रोग बढ़ेंगे। सीमेंट भट्ठियों से बड़े पैमाने पर कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें हवा में छोड़ी जाती हैं। दुनियाभर के कुल कार्बन उत्सर्जन में से ७ से ८ प्रतिशत उत्सर्जन अकेले सीमेंट उद्योग के कारण होता है। इससे ग्लोबल वार्मिंग का खतरा बढ़ गया है। सीमेंट उत्पादन के लिए लाखों लीटर पानी खींचा जाएगा, हवा में सीमेंट की धूल खेतों की फसलों और मिट्टी पर जमेगी। इससे मिट्टी की सख्त परत बनकर जमीन की उर्वरता नष्ट हो जाएगी। अंबरनाथ का सीमेंट प्रोजेक्ट भी अडानी का ही है। अंबुजा सीमेंट कंपनी को कब्जे में लेकर उनकी नई परियोजना का निर्माण शुरू है। प्रदूषण के डर से स्थानीय लोगों ने इस प्रोजेक्ट का तीव्र विरोध शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार, अडानी समूह ने इस जगह पर प्रदूषण-मुक्त ‘लॉजिस्टिक्स पार्क’ बनाने की घोषणा की थी। लेकिन अब अचानक वहां सीमेंट कारखाना बनाने का पैâसला ले लिया। अंबरनाथ का सीमेंट प्रोजेक्ट भी घनी आबादी वाले इलाके में बनाया जा रहा है। फडणवीस सरकार ने अडानी को इस काम की अनुमति देकर जनता को मौत के दरवाजे पर धकेल दिया है। इतनी क्रूरता हमारे शासकों के खून में आती कहां से है? अडानी के उद्योग को पर्यावरण और वन विभाग के कोई भी नियम लागू नहीं होते। धारावी पुनर्वास परियोजना में सरकार ने नियम तोड़कर अडानी समूह पर विशेष रियायतों की बारिश की है। अडानी अगर ईमानदार उद्योगपति होते तो नियमों से चलते, लेकिन वे भ्रष्ट रास्ते से, देश को लूटकर अपनी संपत्ति बढ़ा रहे हैं। अडानी का कोई भी उद्योग साफ-सुथरा नहीं है। हर जगह उनके उद्योगों का विरोध हो रहा है। मुरबाड में मालशेज घाट क्षेत्र में प्रस्तावित अडानी रिन्यूएबल एनर्जी के प्रोजेक्ट का ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया है। इस प्रोजेक्ट के लिए कालू नदी से लगभग ९.८८ मिलियन घन मीटर पानी निकाला जाएगा। आदिवासियों की १६६.०६ हेक्टेयर जमीन कब्जे में ली जाएगी, लेकिन भूमिपुत्रों ने इसका विरोध किया है। इस प्रोजेक्ट के लिए फडणवीस सरकार ने ठाणे-पालघर जिले का पूरा प्रशासन अडानी की सेवा में झोंक दिया है। देश की पूरी संपत्ति एक ही व्यापारी के हाथ में जाना देश के लिए सबसे बड़ा खतरा है। जो मन में आए वो करना और मामला अदालत में जाए तो वहां भी हेरा-फेरी करके छूट जाना। अमेरिका की अदालत में भी वही हुआ। अमेरिका में अडानी के खिलाफ रिश्वतखोरी का मुकदमा चल रहा था, जो मुकदमा प्रेसिडेंट ट्रंप के दबाव से अब रद्द कर दिया गया। संबंधित अदालत ने इस पर चिंता व्यक्त की। ‘हाइली अनयूजुअल’ (अत्यंत असामान्य) जैसे शब्द उन्होंने कहे। अडानी को अमेरिकी अदालत में बचाने के लिए मोदी ने भारतीय राष्ट्रहित की बलि चढ़ा दी। भारत में भी लोकतंत्र के नाम पर जो ‘अडानीतंत्र’ जारी है, वह चिंताजनक है। रायगढ़ और अमरावती की ८४ हजार वर्ग फुट वन भूमि नियम तोड़कर अडानी को देना ताबूत की आखिरी कील साबित होगा। अलीबाग की सीमेंट कंपनी के लिए सैकड़ों एकड़ मैंग्रोव्ज काट दिए जाएंगे। वन्यजीव मारे जाएंगे। यह मैंग्रोव्ज की जमीन ही अडानी समूह की कब्रगाह बनेगी, इसमें हमारे मन में कोई शंका नहीं है। स्वतंत्रता दिवस पर जनता ‘वंदे मातरम’ गाएगी। मोदी और उनके भक्त ‘वंदे अडानी’ गाएं। देश उसी विनाश के मुहाने पर खड़ा है!
