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महाराष्ट्र में फिर वोट चोरी का खतरा? … १.८० करोड़ मतदाताओं को ‘लापता’ करने का शक!

महाराष्ट्र की वोटर लिस्ट पर बड़ा सवाल, इतनी विशाल आबादी अचानक कैसे हुई ‘अनट्रेस्ड’?
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि १.८० करोड़ मतदाताओं का पता क्यों नहीं चल रहा, बल्कि यह है कि क्या इतनी बड़ी संख्या को ‘अनट्रेस्ड’ बताकर चुनाव आयोग भविष्य में उनके नाम वोटर लिस्ट से हटाने की जमीन तैयार कर रहा है?
राज्य में करीब १.८० करोड़ मतदाताओं के ‘गणना फॉर्म’ अब तक कलेक्ट नहीं हो सके हैं या उन्हें दर्ज पते पर सत्यापित नहीं किया जा सका है। अकेले मुंबई में यह संख्या करीब ३० लाख बताई जा रही है। यहीं से संदेह पैदा होता है। महाराष्ट्र में १.८० करोड़ कोई मामूली संख्या नहीं है। यह कई राज्यों की कुल आबादी से भी बड़ा आंकड़ा है। सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या करोड़ों लोग अचानक अपने घरों से गायब हो गए या सत्यापन व्यवस्था ही इतनी कमजोर है कि वैध मतदाता भी ‘नॉट फाउंड’ की श्रेणी में डाल दिए जा रहे हैं?

नीयत और पारदर्शिता पर सवाल
लोकतंत्र में सवाल केवल प्रक्रिया का नहीं, नीयत और पारदर्शिता का भी होता है। यदि १.८० करोड़ लोगों को ‘अनट्रेस्ड’ बताया जा रहा है तो आयोग को सार्वजनिक रूप से यह भी बताना चाहिए कि इनमें कितने मृत हैं, कितनों ने पता बदला, कितने डुप्लीकेट हैं और कितने वास्तविक मतदाता सिर्फ प्रशासनिक विफलता के कारण सत्यापित नहीं हो पाए। वरना यह सवाल पीछा नहीं छोड़ेगा, क्या मतदाता गायब हैं या मतदाताओं को गायब दिखाने की भूमिका लिखी जा रही है?

२७ अक्टूबर को प्रकाशित होगी मतदाता सूची
चुनाव आयोग की प्रक्रिया में ऐसे मतदाताओं में पता बदल चुके, मृत, डुप्लीकेट या लंबे समय से अनुपस्थित लोग भी शामिल हो सकते हैं। इसलिए यह कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा कि १.८० करोड़ नाम काटने का अंतिम पैâसला हो चुका है। लेकिन चिंता इसलिए गंभीर है क्योंकि यदि कोई मतदाता समय पर सत्यापित नहीं हुआ और उसका नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर चला गया, तो उसे फिर दावा-आपत्ति की प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। निर्वाचन आयोग ने सत्यापन की समयसीमा १७ अगस्त २०२६ तक बढ़ाई है और अंतिम मतदाता सूची २७ अक्टूबर २०२६ को प्रकाशित होनी है।

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