-लोकतंत्र में हर नागरिक की आवाज सुनना सरकार की जिम्मेदारी है। आस्था का सम्मान जरूरी है, लेकिन छात्रों के सवालों का सम्मान भी उतना ही जरूरी है।
उत्तर प्रदेश में इन दिनों सरकार के तौर-तरीकों को लेकर एक तीखा सवाल उठ रहा है। कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा और छात्रों पर लाठीचार्ज क्यों? एक तरफ धार्मिक यात्राओं के स्वागत में फूल बरसाने की तस्वीरें सुर्खियां बटोरती हैं, तो दूसरी तरफ स्कूलों की समस्याओं को लेकर सड़क पर उतरे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई सवालों के घेरे में आ जाती है।
जेन-अल्फा के बच्चे स्कूलों में शिक्षक, पढ़ाई, सुविधाओं और दूसरी व्यवस्थाओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं। कई जगहों पर छात्रों के प्रदर्शन ने प्रशासन को भी हरकत में आने पर मजबूर किया है। लेकिन जब यही बच्चे अपनी शिकायत लेकर सड़क पर आते हैं, तो सवाल उठता है कि क्या उनकी आवाज सुनने से पहले लाठी जरूरी है? सरकार समर्थक इसे कानून-व्यवस्था का मामला बता सकते हैं, लेकिन विपक्ष के हाथ में अब यही तस्वीर बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकती है। आखिर बच्चों के सवालों का जवाब बातचीत से क्यों नहीं? अगर स्कूलों में सब कुछ दुरुस्त है तो फिर शिकायतों की जांच और संवाद से डर कैसा? लोकतंत्र में हर नागरिक की आवाज सुनना सरकार की जिम्मेदारी है। आस्था का सम्मान जरूरी है, लेकिन छात्रों के सवालों का सम्मान भी उतना ही जरूरी है। अब देखना यही है कि योगी सरकार जेन-अल्फा की आवाज को शिकायत मानकर सुनेगी या प्रदर्शन मानकर दबाएगी?
