मुख्यपृष्ठस्तंभकोर्ट-रूम: चुनाव में बेईमानी अपराध है

कोर्ट-रूम: चुनाव में बेईमानी अपराध है

एड. कनई बिस्वास

धारा १७५, १७६ और १७७

-निर्वाचन से संबंधित झूठा बयान, निर्वाचन से संबंधित अवैध भुगतान तथा निर्वाचन व्यय का लेखा न रखना

भारतीय न्याय संहिता, २०२३ चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए उम्मीदवारों, उनके समर्थकों और चुनाव से जुड़े सभी व्यक्तियों पर कुछ कानूनी जिम्मेदारियां तय करती है। यदि कोई व्यक्ति किसी उम्मीदवार के बारे में जानबूझकर झूठा बयान देकर उसकी चुनावी छवि खराब करता है, चुनाव में कानून के विरुद्ध भुगतान करता है या चुनाव खर्च का सही हिसाब नहीं रखता तो यह दंडनीय अपराध है। धारा १७५, १७६ और १७७ इन्हीं प्रावधानों को स्पष्ट करती हैं।
केस स्टडी- १: ‘निर्वाचन से संबंधित झूठा बयान’ (धारा १७५)
चुनाव प्रचार के दौरान एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर एक उम्मीदवार के बारे में झूठी खबर पैâलाई कि उसके विरुद्ध गंभीर आपराधिक मामला दर्ज है। जांच में यह दावा पूरी तरह गलत निकला और यह भी साबित हुआ कि आरोपी को इसकी सच्चाई पता थी।
अदालत क्या देखेगी?
क्या उम्मीदवार के बारे में कोई झूठा बयान दिया गया था?
क्या आरोपी को पता था कि यह जानकारी गलत है?
क्या बयान का उद्देश्य उम्मीदवार की चुनावी छवि को नुकसान पहुंचाना था?
फैसला- यदि यह साबित हो जाता है कि आरोपी ने जानबूझकर झूठा बयान देकर चुनाव परिणाम को प्रभावित करने का प्रयास किया, तो उसके विरुद्ध धारा १७५ के तहत कार्रवाई की जाएगी। समझें: धारा १७५ का उद्देश्य चुनाव के दौरान झूठी और भ्रामक जानकारी पैâलाकर किसी उम्मीदवार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने से रोकना है। चुनाव में स्वस्थ और निष्पक्ष प्रचार लोकतंत्र की मूल आवश्यकता है।
केस स्टडी- २: ‘निर्वाचन से संबंधित अवैध भुगतान’ (धारा १७६)
एक उम्मीदवार के समर्थक ने चुनाव प्रचार के लिए बड़ी राशि खर्च की, लेकिन वह भुगतान कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नहीं किया गया। जांच में पता चला कि यह खर्च अधिकृत चुनाव खाते में भी दर्ज नहीं था।
अदालत क्या देखेगी?
क्या चुनाव से संबंधित भुगतान कानून के अनुसार किया गया था?
क्या भुगतान के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया?
क्या यह भुगतान चुनाव को प्रभावित करने के उद्देश्य से किया गया था?
फैसला- यदि यह साबित हो जाता है कि चुनाव में अवैध भुगतान किया गया, तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध धारा १७६ के तहत कार्रवाई की जाएगी। समझें: धारा १७६ यह सुनिश्चित करती है कि चुनाव में होने वाला प्रत्येक भुगतान कानून के अनुसार और पारदर्शी तरीके से किया जाए। गुप्त या अवैध भुगतान चुनाव की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकते हैं।
केस स्टडी- ३: ‘निर्वाचन व्यय का लेखा न रखना’ (धारा १७७)
एक उम्मीदवार ने चुनाव प्रचार पर काफी धनराशि खर्च की, लेकिन उसने चुनाव खर्च का पूरा हिसाब न तो तैयार किया और न ही निर्धारित समय में संबंधित अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया।
अदालत क्या देखेगी?
क्या उम्मीदवार या उसके चुनाव अभिकर्ता ने चुनाव व्यय का लेखा रखा?
क्या लेखा कानून के अनुसार और निर्धारित समय में प्रस्तुत किया गया?
क्या लेखा न रखने या प्रस्तुत न करने का पर्याप्त प्रमाण है?
फैसला- यदि यह साबित हो जाता है कि चुनाव व्यय का लेखा कानून के अनुसार नहीं रखा गया, तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध धारा १७७ के तहत कार्रवाई की जाएगी। समझें: धारा १७७ का उद्देश्य चुनावी खर्च में पारदर्शिता बनाए रखना है। प्रत्येक उम्मीदवार के लिए चुनाव व्यय का सही लेखा रखना और निर्धारित नियमों के अनुसार प्रस्तुत करना कानूनी जिम्मेदारी है।
भारतीय न्याय संहिता यह स्पष्ट करती है कि निष्पक्ष चुनाव केवल मतदान तक सीमित नहीं है। चुनाव प्रचार के दौरान झूठी जानकारी फैलाना, अवैध भुगतान करना और चुनाव खर्च का सही हिसाब न रखना भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करता है।
(अगले अंक में: धारा १७८, १७९ और १८०- ‘सिक्के, सरकारी स्टांप, करेंसी नोट या बैंक नोट की जालसाजी, जाली सिक्के, सरकारी स्टांप, करेंसी नोट या बैंक नोट को असली बताकर चलाना तथा ऐसे जाली सिक्के, सरकारी स्टांप, करेंसी नोट या बैंक नोट अपने पास रखना’ को आसान उदाहरणों के साथ समझेंगे।)

अन्य समाचार