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स्वास्तिक पर पैर, आस्था पर वार?

अमित शाह की तस्वीर ने बीजेपी के ‘हिंदुत्व’ पर खड़े किए तीखे सवाल!

उमन गुप्ता
हिंदुत्व, सनातन और धार्मिक प्रतीकों की राजनीति करने वाली भारतीय जनता पार्टी के सामने एक पुरानी तस्वीर फिर सवाल बनकर खड़ी हो गई है। तस्वीर में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष और वर्तमान गृहमंत्री अमित शाह स्वास्तिक चिह्न वाली एक चौकी पर खड़े होकर चुनावी सभा को संबोधित करते दिखाई देते हैं। यह तस्वीर दिसंबर २०१८ में राजस्थान विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान बालोतरा की सभा से जुड़ी बताई गई थी। पैâक्ट-चेक के अनुसार तस्वीर वास्तविक थी और इसे अमित शाह के आधिकारिक फेसबुक पेज पर भी पोस्ट किया गया था। अब सवाल सीधा है, जिस स्वास्तिक को हिंदू परंपरा में शुभता और मंगल का प्रतीक माना जाता है, उस पर पैर रखकर खड़े होने की तस्वीर सामने आए तो इसे सिर्फ संयोग कहकर नजरअंदाज कर दिया जाए? यहां मुद्दा किसी व्यक्ति की नीयत पर पैâसला सुनाना नहीं, बल्कि उस राजनीतिक दोहरेपन पर सवाल उठाना है जिसमें धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल चुनावी मंचों पर बड़े-बड़े दावों के साथ किया जाता है, लेकिन वही प्रतीक सामने हो तो उसके प्रति संवेदनशीलता कहां गायब हो जाती है?
हिंदुत्व भाषण में बड़ा, व्यवहार में छोटा?
भाजपा की राजनीति में स्वास्तिक, भगवा, राम और सनातन जैसे प्रतीकों का विशेष महत्व रहा है। चुनावी भाषणों में हिंदू आस्था की रक्षा के दावे किए जाते हैं। ऐसे में जब पार्टी के शीर्ष नेता की तस्वीर में स्वास्तिक चिह्न पर पैर दिखाई देता है, तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठते हैं। आस्था अगर राजनीतिक भाषण का विषय है तो उसके प्रतीकों के सम्मान की जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी होनी चाहिए। देश के गृह मंत्री और भाजपा के सबसे बड़े नेताओं में शामिल व्यक्ति की तस्वीर सामने आए तो स्वाभाविक रूप से राजनीतिक बहस होगी। धर्म को राजनीति की सीढ़ी बनाने वालों से यह सवाल पूछना जरूरी है कि धर्म के प्रतीकों का सम्मान सिर्फ मंच से नारे लगाने तक क्यों सीमित रहे?
आस्था किसी पार्टी की जागीर नहीं
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हिंदू आस्था किसी राजनीतिक दल की निजी संपत्ति नहीं है। तस्वीर पुरानी है, लेकिन सवाल आज भी जिंदा है। हिंदुत्व का दावा करने वाली राजनीति से अब हिंदू समाज सिर्फ भाषण नहीं, व्यवहार में भी आस्था का सम्मान चाहता है।

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