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गरीबों के बैंक खाते खरीदकर क्रिकेट बेटिंग …‘फ्री पैसों’ के लालच में खुला २५ करोड़ का साइबर साम्राज्य!

– गेमिंग और ठगी की रकम घुमाते थे ठग
– १७ खातों में २ महीने में २५.४५ करोड़ रुपए का खेल
सामना संवाददाता / मुंबई
‘घर बैठे कमाई’, ‘गेमिंग से पैसा’ और क्रिकेट मैच में सट्टेबाजी के नाम पर चल रहे साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क का डोंगरी पुलिस ने पर्दाफाश किया है। अंतर्राज्यीय गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को २-३ हजार रुपये का लालच देकर उनके बैंक खाते हासिल करता था और उन्हीं खातों में करोड़ों रुपये की साइबर ठगी की रकम घुमाई जाती थी। पुलिस ने इस नेटवर्क से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
जांच में सामने आया है कि महज १७ बैंक खातों के जरिए डेढ़ से दो महीने में २५ करोड़ ४५ लाख रुपये का लेन-देन हुआ। इन खातों का संबंध देशभर में दर्ज ३८ साइबर अपराधों और शिकायतों से पाया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी पहले लोगों को आसान कमाई का सपना दिखाते थे। बैंक खाता खुलवाने के बाद उसकी पासबुक, डेबिट कार्ड, चेकबुक, सिम कार्ड और यहां तक कि ओटीपी भी अपने कब्जे में ले लेते थे। इसके बाद इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन गेमिंग, क्रिकेट बेटिंग और साइबर ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में भेजने के लिए किया जाता था। साइबर अपराध की भाषा में ऐसे खातों को ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है।
सैंडहर्स्ट रोड रेलवे स्टेशन के बाहर डॉ. महेश्वरी रोड, डोंगरी में छापेमारी कर पुलिस ने तीन आरोपियों को दबोचा। उनके पास से ४२ बैंक पासबुक, ७० डेबिट कार्ड, ३६ सिम कार्ड, २३ मोबाइल, ३ लैपटॉप, एक टैब, १२ बैंक किट और एक कार बरामद हुई। जब्त सामान की कीमत करीब ५० लाख रुपये बताई गई है। जांच में ११० संदिग्ध बैंक खाते सामने आए हैं। इनमें से १७ खातों का संबंध महाराष्ट्र समेत कर्नाटक, तेलंगाना, दिल्ली, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, गुजरात और पश्चिम बंगाल में दर्ज मामलों से मिला है। पुलिस ने पांच अन्य आरोपियों की पहचान कर ली है, जबकि तीन महिलाओं को नोटिस दिया गया है।
‘आसान कमाई’ के लालच में खाता न बेचें
पुलिस ने चेतावनी दी है कि बैंक खाता, पासबुक, डेबिट कार्ड, सिम, पिन या ओटीपी किसी को देना अपराध है। संदिग्ध लेन-देन नजर आते ही बैंक और साइबर हेल्पलाइन १९३० पर शिकायत करें।

 

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