शानदार सेवा रिकॉर्ड वालों का टूट रहा हौसला
इंतजार करते-करते २ पुलिसकर्मियों की हो गई मौत
फिरोज खान / मुंबई
वर्दी पर सजने वाला प्रतिष्ठित राष्ट्रपति पुलिस सेवा पदक महाराष्ट्र के करीब ३०० पुलिसकर्मियों के लिए अब सम्मान से ज्यादा इंतजार और पीड़ा का कारण बन गया है। वर्ष २०२३ और उसके बाद उत्कृष्ट सेवा के लिए चुने गए इन पुलिसकर्मियों को अब तक पदक नहीं मिल सके हैं।
हालात इतने निराशाजनक हैं कि पदक मिलने की प्रतीक्षा करते-करते दो पात्र पुलिसकर्मियों की मौत भी हो चुकी है। इसके बावजूद अब तक यह साफ नहीं है कि सम्मान समारोह कब होगा और वितरण में इतनी लंबी देरी आखिर क्यों हुई। पदक की जानकारी लेने के लिए कुछ पुलिसकर्मी मुंबई के लोक भवन तक भी पहुंचे, लेकिन वहां से भी उन्हें कोई ठोस जवाब नहीं मिला।
फाइलों में अटका सम्मान
नियमों के मुताबिक, सेवा पदकों का वितरण राज्यपाल के हाथों किया जाता है। पुलिसकर्मियों का कहना है कि लंबे समय तक समारोह न होने से कई वर्षों की सूची लंबित होती चली गई। अब उन्हें बताया जा रहा है कि बरसात के बाद लोक भवन के लॉन में समारोह आयोजित किया जा सकता है। पदक चयन की प्रक्रिया बेहद सख्त होती है। गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद नाम राष्ट्रपति के अनुमोदन के लिए भेजे जाते हैं और इसके बाद राज्य स्तर पर सम्मान समारोह आयोजित होता है। ऐसे में मंजूरी मिल जाने के बाद भी वर्षों तक पदक न मिलना पुलिस बल के भीतर सवाल खड़े कर रहा है।
‘यह धातु नहीं, जिंदगी भर की सेवा का सम्मान है’
पदक का इंतजार कर रहे एक पुलिसकर्मी का कहना है कि राष्ट्रपति पदक केवल धातु का टुकड़ा नहीं, बल्कि २०-२५ साल की सेवा, रात-दिन की ड्यूटी और जान जोखिम में डालकर निभाए गए कर्तव्य की पहचान है। जब किसी जवान को उसका सम्मान समय पर नहीं मिलता, तो चोट सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं लगती, बल्कि पूरी फोर्स का मनोबल प्रभावित होता है। अब सवाल सरकार से है कि बहादुरी और उत्कृष्ट सेवा का सम्मान भी क्या सरकारी फाइलों और प्रोटोकॉल का इंतजार करता रहेगा। सम्मान में देर हुई तो तमगे की चमक ही नहीं, जवानों का हौसला भी फीका पड़ता है।
