बोलना लगता है अच्छा
सब जन करते संवाद
नाभी से निकला नाद
बनता शब्दों का संदेश।
कथित शब्द हो सकते
मीठे और कड़वे
खुल कर अन्यथा दबा कर
रहस्य खुलते या भरमाये जाते।
मौन रहा जाता है, किंतु
कठिन है नि:शब्द हो कर रहना
दबाई आकांक्षाएं, कभी खुशियां
नहीं सहन होती असीम खामोशी।
सरिता का बहना ही जीवन है उसका
पाषाणों के वक्षस्थल को चीर कर बहना,
फिसलना, गिरना छिटकना
आइना है उसके साहस का।
ताल, तड़ाग बने जलाशय
तृष्णा मिटती जन मानस की
जल भराव सर्वदा नहीं सूखता
ना बनती बाधा भीमशिला किसी की
अनर्थ हो जाता कई गुणा
कर्ण सुनते अनेक ध्वनियां
हो पुकार वेदना के क्षणों में
परिवर्तित होते मन के भाव
नाद हो किसी वाद्ययंत्र का
हाथ दे देते थाप।
होता आनंदित चित सुन कलरव
आंधी, दामिनी, गर्जना मेघों की
कोमलांगी नायिका होती भयभीत।
बधिरता बना देती मानव को असहाय
निरीहिता चेहरे का बनती दर्पण
बिना सुने नहीं होता वार्तालाप।
कृपा हो प्रभु की सभी जीवों का
बना रहे सबका स्वास्थ।
-बेला विरदी
