मुख्यपृष्ठसंपादकीयसंपादकीय :  कच्चा ‘मटर' उछल रहा है!.. पगारिया का पेड इवेंट!

संपादकीय :  कच्चा ‘मटर’ उछल रहा है!.. पगारिया का पेड इवेंट!

राहुल गांधी ने मोदी-शाह और उनकी नई भाजपा की नाक में दम कर दिया है। गांधी युवाओं के मुद्दों पर खुद बोलते हैं और बच्चों को बोलने का मौका देते हैं। गांधी के इस ‘लाइव’ कार्यक्रम को देशभर में भारी समर्थन मिल रहा है, जिससे भाजपा के ‘नौटंकी जी’ घबरा गए हैं। उन्होंने तुरंत अपने मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को फरमान जारी कर दिया, ‘हमने जिन युवाओं का दिमाग बारह सालों तक खराब करके रखा था, राहुल गांधी उनके उस सुन्न पड़े दिमाग को दुरुस्त करने लगे हैं। उनमें से लाखों युवा अब ‘मोदी… मोदी’ के बजाय ‘राहुल… राहुल… राहुल’ के नारे लगा रहे हैं। मंत्रियों, अगर यह ऐसा ही चलता रहा तो गड़बड़ हो जाएगी। आप भी कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में जाकर ‘जेन-जी’ से मिलिए, सभाएं कीजिए।’ मोदी के हुक्म पर कई मंत्री कॉलेजों में जाकर छात्रों से संवाद करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह युवा वर्ग अब उन्हें भाव नहीं दे रहा। अब वह ‘नमो’ के नाम पर गुमराह होकर पकौड़े तलने का स्टार्टअप नहीं शुरू करेगा। डिग्री धारक फुटपाथ पर चाय नहीं बेचेगा। वह दबेगा नहीं। वह धार्मिक नफरत में अंधा होकर सड़कों पर हुड़दंग नहीं मचाएगा। इस वजह से मोदी-शाह की पार्टी की हालत खराब हो चुकी है। पुणे में गांधी ने ‘छात्रों की गूंज’ नाम से युवाओं का एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया। हजारों छात्र-छात्राएं राहुल गांधी से बातचीत करने पुणे पहुंचे। यह कार्यक्रम रद्द कराने के लिए फडणवीस और उनकी पुलिस व्यवस्था ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया। पहले तो पुणे के कार्यक्रम की इजाजत ही नहीं दी। वैâसा डर है यह! फिर जब तनाव बढ़ा तो ३०-३५ शर्तों के साथ पुलिस कमिश्नर ने मंजूरी दी। कार्यक्रम की पूर्व संध्या पर ‘अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद’ के
भाजपा समर्थित गुंडों ने
पुणे में जमकर उत्पात मचाया और दंगा भड़काने की कोशिश की। आयोजन में शामिल कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर हमले किए गए। पुलिस तमाशबीन बनी रही और उल्टा कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर ही मामले दर्ज कर लिए। पुणे पुलिस कमिश्नर की लाचारी और चाटुकारिता का यह जीता-जागता उदाहरण है। जब पुणे में भाजपा नेताओं के कार्यक्रम होते हैं तो क्या उन पर भी ये ३०-३५ शर्तें लागू होती हैं? इसका जवाब पुणे पुलिस कमिश्नर दें। देवेंद्र फडणवीस पुणे के युवाओं के जनाक्रोश से डर गए इसलिए पुलिस कमिश्नर डरे और भाजपा कार्यकर्ता डरे; उनकी कायरता साफ झलक रही है। राहुल गांधी पुणे में सफल ‘युवा उत्सव’ यानी ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम खत्म करके जैसे ही निकले, मुख्यमंत्री फडणवीस ने रविवार को नागपुर में ‘जेन-जी’ उत्सव आयोजित कर दिया। यह तो वही बात हुई कि मोरनी को नाचता देख मोर भी नाचने लगे। इस कार्यक्रम का आयोजन संघ मुख्यालय के सामने रेशम बाग मैदान में किया गया और संघ स्वयंसेवकों के बच्चों को ‘फुल पैंट’ पहनाकर ‘जेन-जी’ बनाकर बैठा दिया गया। इस पर भी बेहिसाब खर्च हुआ, लेकिन हमारे मुख्यमंत्री बोले, ‘राहुल के युवाओं के कार्यक्रम पेड पब्लिसिटी इवेंट हैं। उनके कार्यक्रम का खर्च कौन उठाता है? इसकी जांच की जाएगी।’ मुख्यमंत्री गृह मंत्री भी हैं, इसलिए वह ‘जांच’ जैसी भाषा का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन उन्हें ऐसी ‘जांच’ अपने खुद के पेड इवेंट से शुरू करनी चाहिए। मोदी-शाह और कुल मिलाकर भाजपा के सभी इवेंट क्या ‘कौड़ियों’ के खर्च में होते हैं? ‘जंतर-मंतर’ पर युवाओं के खिलाफ अवैध रूप से
‘पैलेट गन्स’ का
इस्तेमाल किया गया। युवाओं की आंखें फोड़ दी गर्इं। यह आदेश किसने दिया? जब संसद में यह सवाल पूछा गया, तो गृह मंत्री शाह ऐसे भागे कि अब तक गायब हैं। उनके चेले अब ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के खर्च का हिसाब मांग रहे हैं और जांच कर रहे हैं। गांधी ने मोदी-शाह और पूरी भाजपा को पगला बना दिया है और उन्हें अधमरा कर छोड़ा है, यह तो तय है। युवा वर्ग भाजपा से सिर्फ नाराज नहीं है, बल्कि भड़का हुआ है। मोदी-शाह और फडणवीस के वही घिसे-पिटे भाषणों में अब उन्हें कोई दिलचस्पी नहीं है। वही वादे, वही हिंदू-मुसलमान के तनाव की अफीम, स्टार्टअप, देशभक्ति (का ढोंग), इन सब से लोग ऊब चुके हैं। आत्ममुग्धता के नशे में ये लोग आज भी चूर हैं। सड़कों और गड्ढों में हो रहे घोटालों पर फडणवीस कुछ नहीं बोलते। नासिक के गड्ढों में गिरकर जो बारह जानें गर्इं, उनमें सात लोग ‘जेन-जी’ थे। राज्य में स्कूली पोषण आहार की खरीद और आपूर्ति में बड़ा घोटाला जारी है। स्कूली बच्चों को बेहद घटिया खाना देकर ‘सप्लाई ठेकेदार’ करोड़ों का मुनाफा कमा रहे हैं और बच्चों को मौत के मुंह में धकेल रहे हैं। आंबेगांव के स्कूल में बच्चों को जो ‘मटर’ दिया गया, वह कुकर की १३ सीटियों के बाद भी नहीं पका। उसी पत्थर जैसे सख्त मटर को खाकर बच्चों को जीना-मरना पड़ रहा है। यह स्कूली पोषण आहार का ठेकेदार भाजपा और फडणवीस का खास आदमी नागपुर का ‘पगारिया’ है। इसी पगारिया ने नागपुर में फडणवीस का ‘जेन-जी’ उत्सव आयोजित करने में आर्थिक मदद की (पेड इवेंट), अगर ऐसा कहा जाए तो फडणवीस उस कड़े, न पकनेवाले मटर की तरह उछल पड़ेंगे। लेकिन राज्य के हालात यही हैं। कई भ्रष्ट पगारिया ही भाजपा की असली ताकत हैं। फडणवीस पहले आत्मचिंतन करें और फिर सभी पेड इवेंट्स की जांच करवाएं। यह तय है कि अब उनका झूठ का यह मटर गलने वाला नहीं है!

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