सुनील ओसवाल / मुंबई
महाराष्ट्र की सत्ता पर काबिज महायुति में सबकुछ ठीक है, ऐसा दिखाने के लिए अब ‘डिनर डिप्लोमेसी’ का सहारा लिया जा रहा है। आगामी २५ अगस्त की शाम महायुति के मंत्री, विधायक और प्रमुख नेता एक ही छत के नीचे जुटेंगे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और दोनों उप मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में होनेवाला यह स्नेहभोज महज खाना-पीना नहीं, बल्कि महायुति के भीतर चल रहे बेबनाव पर पर्दा डालने और तीनों दलों को एकजुट रखने की बड़ी राजनीतिक कवायद माना जा रहा है।
सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि पिछले कुछ महीनों से महायुति के तीनों घटक दलों के नेताओं और विधायकों के बीच सरकारी योजनाओं के श्रेय, विकास निधि, उद्घाटन और स्थानीय राजनीतिक वर्चस्व को लेकर खींचतान बढ़ी है। कई जगह महायुति के ही नेता एक-दूसरे पर सार्वजनिक रूप से निशाना साधते दिखाई दिए। इससे विपक्ष को सरकार पर हमला करने का हथियार तो मिला ही, साथ ही महायुति के भीतर सब कुछ ठीक नहीं होने की चर्चा भी तेज हुई।
इसीलिए २५ अगस्त का यह स्नेहभोज बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री फडणवीस इस मौके पर तीनों दलों के लोकप्रतिनिधियों को गठबंधन धर्म का पाठ पढ़ा सकते हैं। सरकार की उपलब्धियों का श्रेय अकेले लेने के बजाय तीनों दलों को साथ लेकर चलने और सार्वजनिक मंचों पर आपसी मतभेदों को हवा न देने का संदेश दिए जाने की संभावना है।
महायुति के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष नहीं, बल्कि कई जगहों पर अपने ही नेताओं के बीच चल रहा ‘क्रेडिट वॉर’ है। सरकारी योजना कौन लाया, विकास कार्य किसके प्रयास से हुआ, निधि किसके क्षेत्र में गई और जनता के सामने उसका श्रेय कौन लेगा, इन सवालों ने घटक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा को कई बार टकराव में बदल दिया है। इसी पर लगाम लगाने के लिए डिनर की मेज से ‘काम महायुति का, श्रेय महायुति का’ का संदेश देने की तैयारी है। विधायकों को आपसी समन्वय बढ़ाने, सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करने से बचने और किसी भी विवाद को पहले गठबंधन के भीतर सुलझाने की हिदायत दिए जाने की चर्चा है।
तीनों दलों में विस्तार को लेकर टकराव
भाजपा, शिंदे गुट और दादा गुट, तीनों ही दल अपने-अपने राजनीतिक विस्तार को मजबूत करने में जुटे हैं। यही राजनीतिक महत्वाकांक्षा कई बार स्थानीय स्तर पर टकराव का कारण बन रही है। एक ही सरकार में रहते हुए तीनों दलों के कार्यकर्ता और नेता अपने-अपने संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। आगामी चुनावी समीकरणों को देखते हुए यह खींचतान और बढ़ सकती है। ऐसे में मुख्यमंत्री फडणवीस के सामने चुनौती सिर्फ सरकार चलाने की नहीं, बल्कि महायुति के तीनों पहियों को एक साथ घुमाने की भी है। २५ अगस्त को तीनों दलों के मंत्री और विधायक एक साथ बैठेंगे, भोजन करेंगे और राजनीतिक संवाद करेंगे। इसका संदेश साफ है, मतभेद हों तो घर के भीतर, लेकिन सार्वजनिक मंच पर महायुति एकजुट दिखनी चाहिए।
