अनिल मिश्र / गया जी
गया जी। रक्षाबंधन को लेकर प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी उहापोह और अटकलों का दौर जारी है। रक्षाबंधन पर्व और त्योहार, दोनों रूपों में मनाया जाता है। पर्व शब्द से पारंपरिक और आध्यात्मिक भाव का बोध होता है, जबकि त्योहार आम बोलचाल की भाषा का प्रचलित शब्द है। रक्षाबंधन भाई-बहन दोनों के लिए उत्सव मनाने का प्रमुख पर्व है। यह हर वर्ष सावन पूर्णिमा के अवसर पर मनाया जाता है।
इसी सिलसिले में बिहार प्रदेश के गया जी धाम के प्रसिद्ध आचार्य नवीन चंद्र मिश्र ‘वैदिक’ ने इस संवाददाता को इस विशेष महत्व वाले दिन के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि रक्षा-सुरक्षा के बंधन का यह पावन उत्सव रक्षाबंधन हम सभी श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को मनाते हैं। पूर्णिमा के पूर्वार्द्ध में भद्रा रहती है, जिसका त्याग किया जाता है।
रक्षाबंधन पर बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं, कुमकुम से तिलक कर अक्षत लगाती हैं, मिठाई खिलाती हैं और भाई उनकी सुरक्षा का संकल्प लेते हैं। पंडित, पुरोहित और आचार्य भी धर्म की सुरक्षा के लिए आशीर्वादस्वरूप अपने शिष्यों और यजमानों को रक्षासूत्र बांधते हैं। वहीं, देवराज इंद्र के युद्ध के लिए प्रस्थान करते समय इंद्राणी द्वारा रक्षाबंधन किए जाने का प्रसंग भी मिलता है।
28 अगस्त को पूरे दिन मनाएं रक्षाबंधन
संवत 2083 अर्थात वर्ष 2026 की श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन पर विचार करें तो 27 अगस्त 2026 को पूर्णिमा प्रारंभ होती है और इसके साथ भद्रा भी लग जाती है। विभिन्न पंचांगों के अनुसार भद्रा समाप्त होने का समय इस प्रकार है—
-निर्णय सागर : रात्रि 9:33 बजे
-मार्तंड : रात्रि 9:28 बजे
-रूपेश महावीर : रात्रि 8:46 बजे
-विश्व : रात्रि 8:28 बजे
-हरिहर हृषीकेश : रात्रि 8:56 बजे
-हृषीकेश (शिव मूर्ति), अन्नपूर्णा एवं हनुमान पंचांग- रात्रि 8:55 बजे
-आदित्य : रात्रि 8:44 बजे
-महावीर पंचांग : रात्रि 8:54 बजे
भद्रा रात्रि में ही समाप्त होने के कारण 28 अगस्त को पूर्णिमा कुछ समय तक रहेगी। विभिन्न पंचांगों में पूर्णिमा समाप्त होने का समय इस प्रकार बताया गया है—
-निर्णय सागर : सुबह 8:42 बजे
-मार्तंड : सुबह 9:48 बजे
-रूपेश महावीर : सुबह 9:19 बजे
-विश्व : सुबह 8:52 बजे
-हृषीकेश हरिहर : सुबह 9:09 बजे
-शिव मूर्ति हृषीकेश, अन्नपूर्णा एवं हनुमान : सुबह 9:19 बजे
-आदित्य : सुबह 9:02 बजे
-महावीर : सुबह 9:18 बजे
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या व्याप्त पूर्णिमा में ही रक्षाबंधन मनाया जाएगा?
आचार्य नवीन चंद्र मिश्र ‘वैदिक’ ने बताया कि संकल्पादि में औदयिक तिथि का उच्चारण किया जाता है। निकट के पूर्व वर्षों में थोड़ी देर तक पूर्णिमा रहने के बावजूद पूरे दिन रक्षाबंधन मनाया गया था। अत: 1998, 2004, 2013 और 2022 के पंचांगों का भी अवलोकन किया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
आचार्य नवीन चंद्र मिश्र ‘वैदिक’ के अनुसार, 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को पूरे दिन नि:संकोच रक्षाबंधन मनाया जाए।
उन्होंने कहा, “सनातन धर्म को सरल बनाने की आवश्यकता है, न कि जटिल।”
रक्षाबंधन की शुभकामनाएं।
आचार्य नवीन चंद्र मिश्र ‘वैदिक’
गया जी धाम, बिहार
संपर्क सूत्र- 7488976003 / 9430071590
