मुख्यपृष्ठस्तंभड्रैगन का वाटर बम... हिंदुस्थान पर सबसे बड़ा खतरा

ड्रैगन का वाटर बम… हिंदुस्थान पर सबसे बड़ा खतरा

-नेपाल में बाढ़ तो बस एक झांकी है
-ब्रह्मपुत्र पर चीन का महाकाय बांध टूटा तो क्या होगा?

नेपाल और तिब्बत सीमा पर हाल ही में आई अचानक बाढ़ ने पूरे इलाके में भीषण तबाही मचाई। तिब्बत की तरफ बनी एक अस्थाई झील के फटने से नेपाल के कई गांव और बुनियादी ढांचे बह गए। इस हादसे का सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि चीन ने आपदा की खबर नेपाल को बहुत देर से दी, जिससे लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
अब इस घटना के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि यह तो केवल एक छोटी सी चेतावनी थी। असली बड़ा खतरा तिब्बत में ब्रह्मपुत्र (यारलुंग सांगपो) नदी पर चीन द्वारा बनाया जा रहा ‘मेडोग सुपर डैम’ है, जो किसी भी बड़े हादसे की सूरत में पूरे दक्षिण एशिया के लिए तबाही का सबब बन सकता है।
खतरनाक इलाके में ‘वाटर बम’ की तामीर
तिब्बत का ‘ग्रेट बैंड’ इलाका, जहां चीन इस विशालकाय बांध का निर्माण कर रहा है, भू-वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील है।
भूकंप का बड़ा खतरा: यह पूरा इलाका सीस्मिक जोन-५ (अत्यधिक भूकंप संभावित क्षेत्र) में आता है। यहां अक्सर बड़े भूकंप आते रहते हैं। वैज्ञानिकों का साफ कहना है कि ऐसी जगह पर इतना भारी-भरकम कंक्रीट का ढांचा खड़ा करना खुद एक बड़े खतरे को दावत देने जैसा है।
भूस्खलन और झील बनने का जोखिम: पहाड़ों से मलबा गिरने की वजह से नदियों का रास्ता रुक जाता है और कुदरती झीलें बन जाती हैं। अगर भूकंप या भूस्खलन से यह बांध क्षतिग्रस्त होता है, तो उसका असर कई मुल्कों को झेलना पड़ेगा।
भारत और बांग्लादेश पर संभावित असर
अगर किसी कुदरती आफत की वजह से यह बांध टूटता है या चीन बिना बताए भारी मात्रा में पानी छोड़ता है, तो इसका सबसे पहला और सीधा नुकसान निचले इलाकों को होगा।
अरुणाचल और असम में तबाही: पानी का प्रचंड सैलाब सीधे अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट से होता हुआ असम के मैदानी इलाकों में दाखिल होगा। इससे चंद घंटों में कई शहर जलमग्न हो सकते हैं और सड़कें, पुल तथा बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप हो सकती है।
बांग्लादेश का डूबना: ब्रह्मपुत्र आगे जाकर बांग्लादेश में पहुंचती है। वहां का बड़ा हिस्सा पहले से ही निचले इलाके में है, इसलिए यह सैलाब लाखों लोगों को बेघर कर देगा।
पर्यावरण को भारी नुकसान: काजीरंगा नेशनल पार्क समेत पूरे पूर्वोत्तर भारत का कुदरती ताना-बाना और जीव-जंतु पूरी तरह तबाह हो सकते हैं।
भारत की चिंता और रणनीति
नेपाल हादसे ने यह साबित कर दिया है कि चीन पड़ोसी देशों के साथ नदियों से जुड़ा डेटा और आपदा की जानकारी वक्त पर साझा करने में ढिलाई बरतता है।
इसी खतरे से निपटने के लिए भारत सरकार ब्रह्मपुत्र (सिआंग) नदी पर अपना एक बड़ा ‘बफर डैम’ बनाने की योजना पर काम कर रही है। इसका मकसद चीन की तरफ से आने वाले अचानक पानी के दबाव को रोकना और निचले इलाकों को डूबने से बचाना है।

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