मुख्यपृष्ठस्तंभकोर्ट-रूम: जाली दस्तावेज अपराध है

कोर्ट-रूम: जाली दस्तावेज अपराध है

एड. कनई बिस्वास
धारा १८४, १८५ और १८६
भाग:६२
सरकारी स्टांप सरकार के राजस्व का महत्वपूर्ण स्रोत हैं। स्टांप शुल्क के माध्यम से सरकार को आय प्राप्त होती है और अनेक कानूनी दस्तावेजों को वैधता मिलती है। यदि कोई व्यक्ति पहले से उपयोग किए जा चुके स्टांप का दोबारा उपयोग करता है, उस पर लगे उपयोग के निशान को मिटा देता है या नकली अथवा काल्पनिक स्टांप तैयार करता है तो इससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचता है। भारतीय न्याय संहिता, २०२३ की धारा १८४, १८५ और १८६ ऐसे अपराधों को रोकने के लिए बनाई गई हैं।
केस स्टडी- १: ‘पहले से उपयोग किए जा चुके सरकारी स्टांप का उपयोग करना’ (धारा १८४)
एक व्यक्ति ने पुराने दस्तावेज से सरकारी स्टांप निकालकर उसे नए अनुबंध पर चिपका दिया। जांच में पता चला कि वह स्टांप पहले ही एक अन्य दस्तावेज पर उपयोग किया जा चुका था।
अदालत क्या देखेगी?
क्या सरकारी स्टांप पहले से उपयोग किया जा चुका था?
क्या आरोपी को इस बात की जानकारी थी?
क्या उसने जानबूझकर उस स्टांप का दोबारा उपयोग किया?
फैसला- यदि यह सिद्ध हो जाता है कि आरोपी ने जानते हुए पहले से उपयोग किए जा चुके सरकारी स्टांप का दोबारा उपयोग किया तो उसके विरुद्ध धारा १८४ के तहत कार्रवाई की जाएगी। समझें: धारा १८४ का उद्देश्य एक ही सरकारी स्टांप का बार-बार उपयोग रोकना है। ऐसा करना सरकार को राजस्व की हानि पहुंचाता है और कानूनन अपराध है।
केस स्टडी- २: ‘सरकारी स्टांप के उपयोग का निशान मिटाना’ (धारा १८५)
एक व्यक्ति ने रासायनिक पदार्थ की सहायता से सरकारी स्टांप पर लगी मुहर और उपयोग के निशान मिटा दिए, ताकि उसे नया दिखाकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सके।
अदालत क्या देखेगी?
क्या स्टांप पर लगे उपयोग के निशान जानबूझकर मिटाए गए?
क्या इसका उद्देश्य स्टांप का दोबारा उपयोग करना था?
क्या इससे सरकार को राजस्व की हानि हो सकती थी?
फैसला- यदि यह सिद्ध हो जाता है कि आरोपी ने स्टांप के उपयोग का निशान मिटाकर उसका पुन: उपयोग करने का प्रयास किया, तो उसके विरुद्ध धारा १८५ के तहत कार्रवाई की जाएगी। समझें: धारा १८५ ऐसे किसी भी प्रयास को अपराध मानती है, जिसमें सरकारी स्टांप पर लगे उपयोग के निशान मिटाकर उसे नया दिखाने की कोशिश की जाए।
केस स्टडी- ३: ‘काल्पनिक सरकारी स्टांपों पर प्रतिबंध’ (धारा १८६)
एक मुद्रणालय में ऐसे स्टिकर और छपे हुए कागज बरामद हुए, जो देखने में सरकारी स्टांप जैसे लगते थे, जबकि वे किसी भी सरकारी प्राधिकरण द्वारा जारी नहीं किए गए थे। उनका उपयोग लोगों को भ्रमित करने के लिए किया जा रहा था।
अदालत क्या देखेगी?
क्या बरामद सामग्री सरकारी स्टांप जैसी प्रतीत होती थी?
क्या वे किसी अधिकृत सरकारी संस्था द्वारा जारी नहीं की गई थीं?
क्या उनका उपयोग लोगों को भ्रमित करने या अवैध लाभ प्राप्त करने के लिए किया जा रहा था?
फैसला- यदि यह सिद्ध हो जाता है कि आरोपी ने काल्पनिक या भ्रामक सरकारी स्टांप तैयार किए, उनका उपयोग किया या उनके प्रसार में भूमिका निभाई तो उसके विरुद्ध धारा १८६ के तहत कार्रवाई की जाएगी। समझें: धारा १८६ का उद्देश्य ऐसे नकली या काल्पनिक स्टांपों पर पूर्ण रोक लगाना है, जो असली सरकारी स्टांप जैसे दिखाई देकर जनता को भ्रमित कर सकते हैं और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
भारतीय न्याय संहिता यह सुनिश्चित करती है कि सरकारी स्टांपों का दुरुपयोग न हो और सरकार के राजस्व की सुरक्षा बनी रहे। उपयोग किए जा चुके स्टांप का दोबारा प्रयोग करना, उसके उपयोग का निशान मिटाना या काल्पनिक सरकारी स्टांप तैयार करना आर्थिक अपराध की श्रेणी में आता है। इन प्रावधानों का उद्देश्य सरकारी दस्तावेजों की विश्वसनीयता और राजस्व व्यवस्था की रक्षा करना है।
(अगले अंक में: धारा १८७, १८८ और १८९ – टकसाल में कार्यरत व्यक्ति द्वारा कानून के विपरीत वजन या मिश्रण का सिक्का बनाना, टकसाल से सिक्का बनाने का उपकरण अवैध रूप से ले जाना तथा अवैध जमाव से संबंधित अन्य अपराधों को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझेंगे।)

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