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संपादकीय: युवाओं के सपनों पर बुलडोजर

‘नीट’ पेपर लीक को लेकर देशभर में युवाओं का आंदोलन खड़ा हुआ, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। ‘जेन-जी’ के आंदोलन की आग अभी बुझी भी नहीं थी कि महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के तहत होनेवाली परीक्षाओं के पेपर लीक हो गए। ड्रग इंस्पेक्टर के पद के लिए आयोजित परीक्षा में खुल्लम-खुल्ला पेपर लीक किया गया। इस पेपर लीक में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसियों की तरह ही महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के अधिकारी भी शामिल हैं। मुंबई पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है और अब इस पूरी भर्ती प्रक्रिया को ही रद्द कर दिया गया है। इस प्रक्रिया में गेहूं के साथ घुन भी पिसता है। नीट पेपर लीक के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा रद्द कर दी थी, उस सदमे में २० छात्रों ने आत्महत्या कर ली थी। अब महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग ने ड्रग इंस्पेक्टर पद की भर्ती रद्द करके युवाओं को आत्महत्या के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। फडणवीस सरकार की इस तरह धज्जियां उड़ चुकी हैं। इनकी सरकार ढंग से एक परीक्षा आयोजित नहीं करा सकती, परीक्षाओं के पेपर सुरक्षित नहीं रख सकती और यही हुक्मरान सीना तानकर विकास, गति और कानून-व्यवस्था पर प्रवचन झाड़ते हैं, जो कि बेहद हास्यास्पद है। महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की कभी बेहद साख और प्रतिष्ठा हुआ करती थी। समाज और प्रशासन के कई दिग्गज, शिक्षाविद महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग में काम करते थे, लेकिन अब बीजेपी ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग को अपनी
राजनीतिक चैरिटी संस्था बना दिया है और उस पर अव्वल दर्जे के शातिर पेपर-लीकबाजों को बिठा दिया है। महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के भ्रष्ट राजनीतिकरण का खामियाजा छात्र भुगत रहे हैं। फडणवीस के अंदरूनी घेरे के अधिकारियों और अंधभक्तों को महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के सदस्य और अध्यक्ष पद मिलते चले गए, इसीलिए पेपर लीक हुए। अगर ४०-४० लाख रुपए में पेपर बिके और भर्ती प्रक्रिया में घोटाले हुए, तो इसमें हैरान होने की जरूरत नहीं है। इस पर अगर कोई सवाल पूछे तो जवाब तैयार है, ‘क्या पेपर लीक की ये घटनाएं पहली बार हो रही हैं? कांग्रेस के राज में भी होती थीं।’ अगर राज्य के मुख्यमंत्री और उनके नादान लोग अपने राज में हुए पेपर लीक का ठीकरा कांग्रेस पर फोड़ते हैं तो यह बेहद शर्मनाक है। आप पिछले दस सालों से सत्ता में हैं इसलिए पेपर लीक से छात्रों का जो नुकसान हुआ है, उसकी जिम्मेदारी आपको ही लेनी होगी। महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग में पहले विशेषज्ञों की ही नियुक्ति होती थी। आज इस आयोग में काम करने वाले लोग ‘विशेषज्ञ’ हैं, ऐसा बिल्कुल नहीं कहा जा सकता। यह बात साफ हो चुकी है कि मुख्यमंत्री फडणवीस और अभिजीत पवार के तार पेपर लीक करने वालों से जुड़े हैं। बीजेपी के मूर्ख शिरोमणि आयोग के सदस्यों ने आरोपियों की तस्वीरें शरद पवार और रोहित पवार के साथ दिखाईं। अगर कोई इस घटिया हरकत को शासन करना कहता है, तो उसकी अक्ल का दिवाला निकल चुका है। २२ मार्च २०२६ को खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में ड्रग इंस्पेक्टर के पद के लिए ‘ऑफलाइन स्क्रीनिंग’ परीक्षा हुई थी। लगभग ४४,५०० उम्मीदवार परीक्षा में बैठे और नतीजा १२ जून को घोषित हुआ। ५०६ लोग इंटरव्यू के लिए योग्य पाए गए, जिनमें से ४८५ उम्मीदवार नियुक्ति के लिए चुने गए। इसी दौरान कुछ उम्मीदवारों और छात्रों ने आयोग को ‘ई-मेल’ भेजकर सूचित किया कि परीक्षा होने से पहले ही ‘पेपर’ लीक हो चुका था। इस मामले में महाराष्ट्र राज्य लोक सेवा आयोग के चार अधिकारी अब सलाखों के पीछे हैं। पुलिस ने कुछ कोचिंग क्लास संचालकों को भी हथकड़ियां पहनाई हैं, लेकिन महाराष्ट्र राज्य लोक सेवा आयोग के मौजूदा अध्यक्ष, जो कोई भी हैं, वे खुले वैâसे घूम रहे हैं? सरकार को उन्हें तुरंत बर्खास्त करना चाहिए और पुलिस पूछताछ के लिए भेजना चाहिए। महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति राज्य के मुख्यमंत्री करते हैं। मुख्यमंत्री से गहरी सांठ-गांठ के बिना यह नियुक्ति हो ही नहीं सकती। इसलिए इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी मुख्यमंत्री फडणवीस की है। आप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री के रूप में कुर्सी से चिपके रहकर फालतू के प्रवचन झाड़ेंगे तो इससे आपके पाप नहीं धुल जाएंगे। महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के पेपर लाखों रुपए में बेचे गए। ऐसी भ्रष्ट मानसिकता के लोगों को इतने महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर बिठाना ही अपने आप में एक संगीन अपराध है। ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री ने अपने इर्द-गिर्द बौद्धिक अपराधियों का जमघट लगा रखा है, जो महाराष्ट्र के भविष्य के लिए बेहद खतरनाक है। फडणवीस के राज में युवाओं के सपनों पर रोज बुलडोजर चलाया जा रहा है, यह बेहद चिंताजनक बात है!

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