मुख्यपृष्ठनए समाचार५० करोड़ के टेंडर को अधिकारियों ने बना दिया २५० करोड़

५० करोड़ के टेंडर को अधिकारियों ने बना दिया २५० करोड़

-कामगार विभाग में कागजी हेरफेर का भंडाफोड़
-चार अधिकारी सस्पेंड, बड़ी मछलियां अब भी बाहर

रामदिनेश यादव / मुंबई
राज्य की महायुति सरकार में भ्रष्टाचार आम बात हो गई है। मंत्री तो मंत्री अधिकारी भी जमकर भ्रष्टाचार करने से बिल्कुल नहीं कतराते हैं। उनके हौसले इतने बढ़ गए हैं कि ५० करोड़ रुपए वाले टेंडर को सीधे ५ गुना बढ़ाकर २५० करोड़ बना दिया। मामला सामने आते ही विभाग, मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई। कार्रवाई के नाम पर ४ अधिकारियों को सस्पेंड भी किया, लेकिन बड़ी मछलियां अब भी पहुंच से बाहर हैं।
यह मामला कामगार विभाग का है। निजी सुरक्षा गार्डों के स्वास्थ्य परीक्षण बीमा के लिए ५० करोड़ रुपये के टेंडर निकाले गए। पर दस्तावेजी हेरफेर के जरिए पांच साल तक बढ़ाकर २५० करोड़ रुपए तक पहुंचा दिया गया। इस मामले ने मंत्रालय में खलबली मचा दी है। मामले में चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस कथित करोड़ों रुपए के खेल के पीछे कौन था और ठेकेदार को फायदा पहुंचाने की कोशिश किसके इशारे पर हुई?
संबंधित ठेकेदार को भारी आर्थिक लाभ पहुंचाने के प्रयास में सेवानिवृत्त मुंबई बोर्ड प्रभारी आयुक्त अशोक डोके सहायक श्रम आयुक्त गौतम नालिंदे, मंत्रालय के श्रम विभाग के अवर सचिव दिलीप वानिरे और संतोष पाटील को निलंबित किया गया है। सूत्रों का दावा है कि इसमें वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। बिना उनके सहमति और सहयोग के इतने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार करने की हिम्मत इन अधिकारियों में नहीं आ सकती। इस मामले में मंत्री आकाश फुंडकर ने सीएम कार्यालय को भी जानकारी देते हुए गहन जांच के लिए प्रस्ताव भेज दिया है। हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से अभी तक इस मामले में जांच के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। मुख्य सचिव की ओर से भी इस पर अबतक कोई ठोस एक्शन नहीं लिया गया है।
बड़ी मछलियां पकड़ से बाहर?
विपक्ष के अनुसार चार अधिकारियों ने कथित तौर पर इतनी बड़ी वित्तीय हेराफेरी का रास्ता बनाया तो क्या यह काम केवल उन्हीं के स्तर पर संभव था? सूत्रों के अनुसार, उप सचिव को भी जांच के दायरे में लिया जाना चाहिए।
डिजिटल फाइल पद्धति से काम शुरू
इस घटना के बाद डरे अधिकारी अब कामकाज में पारदर्शिता और ऐसी घटना से बचने के लिए डिजिटल फाइल अर्थात पीडीएफ को कामकाज में शामिल किया है। सभी फाइलों को पीडीएफ फाइल रख रहे हैं, ताकि कोई गड़बड़ी होने पर वे बच सकें।

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