-धारा १८७, १८८ और १८९
एड. कनई बिस्वास
भाग:६३
भारतीय न्याय संहिता, २०२३ देश की मुद्रा व्यवस्था और सार्वजनिक शांति दोनों की सुरक्षा पर विशेष बल देती है। इसलिए एक ओर टकसाल में होने वाली गड़बड़ियों को गंभीर आर्थिक अपराध माना गया है, वहीं दूसरी ओर ऐसे समूहों पर भी रोक लगाई गई है, जो कानून-व्यवस्था भंग करने के उद्देश्य से एकत्र होते हैं। धारा १८७, १८८ और १८९ इन तीन अलग-अलग प्रकार के अपराधों से संबंधित हैं।
केस स्टडी-१: ‘टकसाल में कार्यरत व्यक्ति द्वारा कानून के विपरीत वजन या मिश्रण का सिक्का बनाना’ (धारा १८७)
सरकारी टकसाल में कार्यरत एक कर्मचारी ने कुछ लोगों के साथ मिलकर ऐसे सिक्के तैयार किए, जिनमें निर्धारित धातु की मात्रा कम थी और उनका वजन भी कानून में तय मानक से कम था। जांच में यह गड़बड़ी पकड़ी गई।
अदालत क्या देखेगी?
क्या आरोपी टकसाल में कार्यरत था? क्या सिक्कों का वजन या धातु का मिश्रण कानून द्वारा निर्धारित मानक से अलग था? क्या यह कार्य जानबूझकर किया गया था?
पैâसला- यदि यह सिद्ध हो जाता है कि आरोपी ने जानबूझकर निर्धारित मानकों से अलग सिक्के तैयार किए, तो उसके विरुद्ध धारा १८७ के तहत कार्रवाई की जाएगी। समझें: धारा १८७ का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी टकसाल से केवल वही सिक्के जारी हों, जिनका वजन और धातु का मिश्रण कानून के अनुसार हो। इसमें किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ देश की मुद्रा व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा मानी जाती है।
केस स्टडी-२: ‘टकसाल से सिक्का बनाने का उपकरण अवैध रूप से ले जाना’ (धारा १८८)
टकसाल का एक कर्मचारी बिना अनुमति सिक्का ढालने में उपयोग होने वाला एक विशेष उपकरण बाहर ले गया। जांच में पता चला कि उसका उपयोग अवैध रूप से सिक्के बनाने की योजना थी।
अदालत क्या देखेगी?
क्या आरोपी टकसाल का उपकरण बिना अधिकार के बाहर ले गया? क्या वह उपकरण सिक्का बनाने में प्रयुक्त होता था? क्या आरोपी की मंशा अवैध उपयोग की थी?
पैâसला- यदि यह सिद्ध हो जाता है कि आरोपी ने टकसाल का उपकरण अवैध रूप से अपने कब्जे में लिया या बाहर ले गया तो उसके विरुद्ध धारा १८८ के तहत कार्रवाई की जाएगी। समझें: धारा १८८ का उद्देश्य टकसाल के विशेष उपकरणों की सुरक्षा करना है। ऐसे उपकरणों का अनधिकृत रूप से बाहर ले जाना भविष्य में जालसाजी या अन्य आर्थिक अपराधों का कारण बन सकता है।
केस स्टडी-३: ‘अवैध जमाव’ (धारा १८९)
एक संगठन ने सैकड़ों लोगों को हथियारों और डंडों के साथ सरकारी कार्यालय पर कब्जा करने के उद्देश्य से इकट्ठा किया। पुलिस ने समय रहते उन्हें रोक लिया और कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
अदालत क्या देखेगी?
क्या पांच या अधिक व्यक्ति एक समान उद्देश्य से एकत्र हुए थे? क्या उनका उद्देश्य कानून के विरुद्ध या सार्वजनिक शांति भंग करने वाला था? क्या उपलब्ध साक्ष्य अवैध जमाव की पुष्टि करते हैं?
पैâसला- यदि यह सिद्ध हो जाता है कि लोगों का समूह कानून में वर्णित अवैध उद्देश्य से एकत्र हुआ था, तो उसके सदस्यों के विरुद्ध धारा १८९ के तहत कार्रवाई की जाएगी। समझें: धारा १८९ के अनुसार यदि पांच या अधिक व्यक्ति ऐसे समान उद्देश्य से एकत्र हों, जो कानून के विरुद्ध हो या जिससे शांति भंग होने की आशंका हो, तो वह अवैध जमाव कहलाता है। केवल भीड़ होना अपराध नहीं है, बल्कि उसका उद्देश्य और परिस्थितियां महत्वपूर्ण होती हैं।
भारतीय न्याय संहिता आर्थिक सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था, दोनों को समान महत्व देती है। इसलिए टकसाल में होने वाली किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को गंभीर अपराध माना गया है। इन प्रावधानों का उद्देश्य देश की आर्थिक व्यवस्था और सामाजिक शांति दोनों की रक्षा करना है।
(अगले अंक में: धारा १९०, १९१ और १९२- समान उद्देश्य की पूर्ति में किए गए अपराध के लिए अवैध जमाव के प्रत्येक सदस्य की जिम्मेदारी, दंगा तथा दंगा कराने के उद्देश्य से जानबूझकर उकसाना से संबंधित अपराधों को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझेंगे।)
