-आर्थिक नगरी मुंबई, दिल्ली से काफी पीछे
-गुजरात भी निकला आगे; राजस्व जुटाने की क्षमता पर महायुति सरकार से सवाल
रामदिनेश यादव / मुंबई
महाराष्ट्र को देश की आर्थिक ताकत का केंद्र माना जाता है। मुंबई देश की वित्तीय राजधानी है। बड़े उद्योग, कारोबार, बैंकिंग, शेयर बाजार और सेवा क्षेत्र का विशाल नेटवर्क महाराष्ट्र में मौजूद है। देश की बड़ी-बड़ी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों का प्रमुख केंद्र होने के बावजूद अपने स्रोतों से कर राजस्व जुटाने के मामले में महाराष्ट्र अपने प्रतिस्पर्धी राज्यों से पिछड़ता दिखाई दे रहा है।
वित्त वर्ष २०२४-२५ के बजट अनुमान के अनुसार, अपने स्रोतों से कर राजस्व जुटाने की हिस्सेदारी के मामले में महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर है। दिल्ली इस मामले में सबसे आगे है। दिल्ली के कुल कर राजस्व में उसके अपने स्रोतों से होने वाली आय की हिस्सेदारी ९१.६ प्रतिशत है। वहीं गुजरात ८५.५ प्रतिशत के साथ महाराष्ट्र से आगे है, जबकि महाराष्ट्र की हिस्सेदारी करीब ८५ प्रतिशत बताई गई है।
सवाल खड़ा कर रहे हैं आंकड़े
महाराष्ट्र और गुजरात के बीच औद्योगिक निवेश और आर्थिक विकास को लेकर लंबे समय से तुलना होती रही है। अब अपने स्रोतों से कर राजस्व जुटाने के आंकड़ों में भी गुजरात महाराष्ट्र से आगे दिखाई दे रहा है। गुजरात की हिस्सेदारी ८५.५ प्रतिशत, जबकि महाराष्ट्र की करीब ८५ प्रतिशत बताई गई है। अंतर भले ही बहुत बड़ा न हो, लेकिन देश की सबसे बड़ी औद्योगिक और वित्तीय अर्थव्यवस्थाओं में शामिल महाराष्ट्र के लिए यह आंकड़ा सवाल जरूर खड़ा करता है।
आर्थिक राजधानी, फिर कमाई में पीछे क्यों?
मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी कहा जाता है। महाराष्ट्र में देश के प्रमुख उद्योग, वित्तीय संस्थान, शेयर बाजार, सेवा क्षेत्र और बड़ी-बड़ी कंपनियां मौजूद हैं। इसके बावजूद अपने स्रोतों से कर राजस्व जुटाने के मामले में महाराष्ट्र का दिल्ली और गुजरात से पीछे रहना कई सवाल खड़े करता है। जब महायुति सरकार लगातार राज्य की मजबूत अर्थव्यवस्था, बड़े निवेश और तेज विकास के दावे करती है, तब राजस्व जुटाने की क्षमता से जुड़े ये आंकड़े सरकार के आर्थिक प्रबंधन पर सवाल उठाते हैं। संसाधन भरपूर, उद्योग भरपूर, कारोबार भरपूर फिर सरकारी खजाने की कमाई में महाराष्ट्र पीछे क्यों?
