-२ महीने में ८,०३२ शिकायतें; विकास की सड़क पर आखिर इतने गड्ढे क्यों?
-करोड़ों की कंक्रीट परियोजना के बावजूद मुंबईकरों की मुसीबत बरकरार
अरुण कुमार गुप्ता / मुंबई
महाराष्ट्र में विकास की रफ्तार के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन बारिश आते ही सड़कें सरकार और प्रशासन की असली परीक्षा लेने लगती हैं। मुंबई में करीब १७ हजार करोड़ रुपए की सड़क कांंक्रीटीकरण परियोजना चल रही है, लेकिन २०२६ के मानसून में गड्ढों ने एक बार फिर सरकार के दावों की पोल खोल दी है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, १० जून से २० अगस्त २०२६ तक मुंबई में गड्ढों से संबंधित ८,०३२ शिकायतें दर्ज हुर्इं। इनमें से ७,८२९ शिकायतों का समाधान करने का दावा मुंबई मनपा ने किया है। यानी करोड़ों रुपए की परियोजना के बावजूद महज ढाई महीने के भीतर हजारों मुंबईकरों को गड्ढों की शिकायत दर्ज कराने पर मजबूर होना पड़ा। सवाल सीधा है। जब मुंबई की सड़कों को मजबूत और गड्ढामुक्त बनाने के लिए १७ हजार करोड़ रुपए की परियोजना चल रही है, तो फिर हजारों शिकायतें क्यों आ रही हैं?
आंकड़े कुछ कहते हैं, सड़कें कुछ और!
मुंबई में वर्ष २०२३ में ५९,५३३ गड्ढे दर्ज किए गए थे। वहीं, २०२६ में मनपा के अनुसार, १० जून से २० अगस्त के बीच ही ८,०३२ गड्ढों की शिकायतें सामने आ चुकी हैं।
विज्ञापन में चमकती सड़क, हकीकत में
मुंबई मनपा के मुताबिक मुंबई का कुल सड़क नेटवर्क करीब २,०५० किलोमीटर है। इनमें लगभग १,२०० किलोमीटर सड़कें वर्ष २०२२ से पहले कंक्रीट की जा चुकी थीं, जबकि २०२२ के बाद अतिरिक्त ६७७ किलोमीटर सड़कों को कांक्रीटीकरण के लिए लिया गया।
इसके बावजूद बारिश शुरू होते ही सड़कें जगह-जगह टूटती हैं और गड्ढे मुंबईकरों के लिए जानलेवा चुनौती बन जाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है। इतना बड़ा सड़क नेटवर्क, इतनी बड़ी परियोजना और हजारों करोड़ रुपए के खर्च के बावजूद आम मुंबईकर को गड्ढों से मुक्ति आखिर कब मिलेगी।
नागपुर में भी गड्ढों की चुनौती
मुंबई ही नहीं, नागपुर में भी गणेशोत्सव से पहले गड्ढों और सड़क मरम्मत को लेकर प्रशासन के सामने चुनौतियां खड़ी हैं। नगर निगम को गड्ढों की मरम्मत के साथ-साथ मशीनरी की उपलब्धता जैसी समस्याओं से भी जूझना पड़ रहा है। त्योहार के दौरान नागरिकों को सुरक्षित और सुगम यात्रा उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी हाल में नगर निकायों को गणेशोत्सव से पहले गड्ढे भरने और सड़क मरम्मत में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए हैं।
विपक्ष का सवाल- सड़क पहले टूटती क्यों है?
विभिन्न विपक्षी दलों ने शहरों में खराब सड़कों और गड्ढों को लेकर सरकार तथा स्थानीय प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि हर साल मानसून आते ही सड़कें टूटती हैं, शिकायतों की संख्या बढ़ती है और इसके बाद प्रशासन ‘युद्धस्तर’ पर मरम्मत अभियान शुरू करता है। सवाल यह है कि सड़कें टूटने के बाद मरम्मत करने के बजाय उन्हें पहले से मजबूत बनाने की स्थायी योजना क्यों नहीं बनाई जाती? विकास के विज्ञापनों में मुंबई की सड़कें कितनी भी चमकदार नजर आएं, लेकिन २०२६ के आंकड़े एक अलग तस्वीर सामने रख रहे हैं। मुंबईकरों को अब भी हर मानसून में गड्ढों से जंग लड़नी पड़ रही है। १७ हजार करोड़ रुपए की परियोजना के बीच ८,०३२ शिकायतें महज आंकड़ा नहीं हैं। ये सरकार और मनपा की सड़क नीति पर खड़ा एक बड़ा सवाल हैं, ‘विकास की सड़क आखिर गड्ढामुक्त कब होगी?’
२०२६ में मुंबई की सड़कों का हाल
गड्ढों की शिकायतें: ८,०३२
मनपा के मुताबिक समाधान: ७,८२९
शिकायत अवधि: १० जून से २० अगस्त २०२६
सड़क कांक्रीटीकरण परियोजना: करीब १७ हजार करोड़ रुपए
मुंबई का कुल सड़क नेटवर्क: करीब २,०५० किमी
२०२३ में दर्ज गड्ढे: ५९,५३३
